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हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरपंचों की सरपंची का रखा मान

By Ankita Published: 3 Jul 2024, 1:04 PM | Updated: 3 Jul 2024, 2:44 PM 1 min read

5 लाख की लिमिट की जगह अब 21 लाख तक…….

चंडीगढ़-हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों को कई सौगातें देते हुए ऐलान किया कि अब सरपंच ई-टेंडरिंग के बगैर 21 लाख रुपए तक के विकास कार्य अपनी ग्राम पंचायतों में करवा सकेंगे। इससे पहले यह लिमिट 5 लाख रूपए थी। इसके साथ ही सरपंचों को टीएडीए देने का भी ऐलान भी मुख्यमंत्री ने किया।

अब सरपंच ग्राम पंचयतों के कार्यों के लिए अपनी गाड़ी या टैक्सी से यात्रा करने पर 16 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा खर्च क्लेम कर सकेंगे। इतना ही नहीं टीएडीए क्लेम करने के बिल का अनुमोदन भी बीडीपीओ के स्तर पर ही हो जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह कुरुक्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय पंचायती राज एवं सरपंच सम्मलेन में प्रदेशभर से आये पंचायत प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे।

पंचायतों के समक्ष मिट्टी के भरत को लेकर आ रही समस्या पर मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा भरत (मिट्टी की लागत) का प्रस्ताव पास करके भेजने पर इसका खर्च भी एस्टीमेट में शामिल किया जाएगा। इससे पहले भरत की लागत कार्य के एस्टीमेट में शामिल नहीं होती थी और भरत का काम मनरेगा से अथवा गांव द्वारा अपने खर्चे पर करवाना पड़ता था।

जूनियर इंजीनियर द्वारा कई महीनों तक एस्टीमेट नहीं बनाने की समस्या का समाधान करते हुए मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि सरपंच जैसे ही किसी विकास कार्य का पंचायत द्वारा पारित किया गया प्रस्ताव हईडब्लू पोर्टल पर डालेगा तो जूनियर इंजीनियर को उसके 10 दिन के भीतर एस्टीमेट बनाकर अपलोड करना होगा।

कोर्ट केसों की पैरवी करने के लिए वकीलों की निर्धारित फीस में बढ़ोतरी करने की घोषणा करते हुई मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला या उपमंडल स्तर पर कोर्ट केस के लिए वकील की फीस 1100 रूपए से बढ़ाकर 5500 तथा उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय में पैरवी हेतु फीस 5500 से बढ़ाकर 33,000 रूपए की जाएगी।

सरपंचों को टीए-डीए देने का भी ऐलान…..

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत द्वारा गांव में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस पर किए जाने वाले आयोजन व विशिष्ट अधिकारी या मंत्री के गांव में आगमन पर किए जाने वाले कार्यक्रम के लिए पंचायत फंड से खर्च की सीमा को 3000 रुपए से बढ़ाकर 30,000 करने की घोषणा की। राष्ट्रीय ध्वज खरीदने या राष्ट्रीय पर्व पर मिठाई बांटने, पंचायत की गतिविधियों के प्रचार करने इत्यादि पर खर्च की सीमा को 500 से बढ़कर 5000 रुपए करने का भी ऐलान किया।

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