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राजगढ़ में पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में बंद, शोकसभा में मारे गए निर्दोषों को श्रद्धांजलि

By हिमांचलनाउ डेस्क नाहन Published: 25 Apr 2025, 4:46 PM | Updated: 25 Apr 2025, 4:46 PM 1 min read

व्यापार मंडल के आह्वान पर शहर की दुकानें रही बंद, समाजसेवियों और नागरिकों ने कहा – अब देश को चाहिए निर्णायक कार्रवाई

राजगढ़

शहर के व्यापारियों ने पहलगाम हमले के विरोध में दिखाया एकजुटता का संदेश
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले के विरोध में आज राजगढ़ शहर में शुक्रवार सुबह व्यापार मंडल के आह्वान पर सभी दुकानें 11 बजे तक बंद रहीं। शहर भर में सन्नाटा पसरा रहा और जनमानस ने शांतिपूर्ण बंद के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

शोकसभा में दो मिनट का मौन, मानवता पर हमला बताया गया यह कृत्य
बंद के उपरांत व्यापार मंडल द्वारा एक शोकसभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी, समाजसेवी और नागरिक उपस्थित रहे। सभा में दो मिनट का मौन रखकर हमले में मारे गए निर्दोषों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

विकल्प ठाकुर बोले – धर्म पूछकर हत्या करना मानवता का अपमान
समाजसेवी विकल्प ठाकुर ने कहा कि यह हमला न केवल कायरतापूर्ण था, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला भी था। उन्होंने कहा कि बच्चों के सामने उनके माता-पिता की हत्या का दृश्य एक ऐसा जख्म है जो जीवन भर नहीं भर सकता। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को उनके धर्म के कारण निशाना बनाना अब असहनीय होता जा रहा है और देश को एकजुट होकर इसका जवाब देना होगा।

पत्रकार वेद प्रकाश ठाकुर ने की नागरिक एकजुटता की अपील
वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश ठाकुर ने शोकसभा में कहा कि इस तरह के हमले केवल एक धर्म या वर्ग पर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और राष्ट्र की एकता पर आघात हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों की आड़ में देश को बांटने की कोशिश हो रही है और अब समय आ गया है कि हर नागरिक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सरकार का समर्थन करे।

अन्य वक्ताओं ने की कठोर कार्रवाई की मांग
पूर्व सैनिक अरुण शर्मा, कांग्रेसी नेता राजेंद्र ठाकुर और व्यापार मंडल अध्यक्ष हरिओम खेड़ा सहित अन्य वक्ताओं ने इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हुए सरकार से मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

जनसामान्य ने दिखाई एकजुटता, पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना
शोकसभा में शामिल लोगों ने एक स्वर में आतंक के खिलाफ कठोर नीति अपनाने की वकालत की और पीड़ित परिवारों के साथ गहरी संवेदना जताई। सभी ने कहा कि अब केवल शोक नहीं, निर्णायक जवाब देना समय की मांग है।