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इस दिन मनाई जाएगी साल की पहली पूर्णिमा, जाने पूजा विधि और…..

PRIYANKA THAKUR | 2 जनवरी 2023 at 1:50 pm

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HNN / नाहन

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की उपासना के साथ लक्ष्मी-नारायण भगवान की उपासना का भी विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से सभी कष्ट एवं दुःख दूर हो जाते हैं। साथ ही भक्तों को यश, वैभव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शास्त्रों में बताया गया है कि पौष पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करने से व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त, शुभ योग एवं पूजा विधि।

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पौष पूर्णिमा 2023 शुभ मुहूर्त
ज्योतिष पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 6 जनवरी प्रातः 02 बजकर 14 मिनट पर हो रहा है। इस तिथि का समापन 7 जनवरी को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर होगा। चन्द्रोदय तिथि के अनुसार यह व्रत 6 जनवरी 2023, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 33 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर होगा। इस दिन चंद्र देव की पूजा का भी विधान है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 04 बजकर 32 मिनट पर होगा।

पौष पूर्णिमा 2023 शुभ योग
6 जनवरी अर्थात पौष पूर्णिमा के दिन 3 अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ करने से भक्तों को भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन ब्रह्म, इंद्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। मान्यता है कि इस योग में पूजा-पाठ का दोगुना फल प्राप्त होता है।

पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें और इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
लक्ष्मी नारायण की हल्दी, रोली, मौली, पुष्प, फल, मिठाई, पंचामृत (तुलसी दल जरूर रहे), नैवेद्य से पूजा करें।
इसके बाद सत्य नारायण की कथा पढ़ें और श्री हरि विष्णु का भजन करें।
शाम के वक्त चंद्रमा को दूध में चीनी, चावल मिलाकर अर्घ्य दें।
गुड़, तिल, कंबल आदि का दान करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
सामर्थ के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें।
आधी रात को माता लक्ष्मी की पूजा करें।
मां लक्ष्मी को धूप, दीप और माला चढ़ाएं।

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