ऊना के अंबोटा की निशु सूद बनीं आत्मनिर्भर, चटनी और अचार व्यवसाय से हर माह 60 हजार तक कमा रहीं आय
Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल
ऊना जिले के अंबोटा गांव की निशु सूद स्वयं सहायता समूह के माध्यम से चटनी और अचार उत्पादन कर प्रतिमाह आय अर्जित कर रही हैं। उनके इस उद्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और उत्पादों की मांग विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
ऊना
स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ कार्य और विस्तार
ऊना जिले के अंबोटा गांव की निशु सूद ने ‘गणेश स्वयं सहायता समूह’ के माध्यम से अपने कार्य की शुरुआत की। प्रारंभ में यह पहल सीमित स्तर पर थी और इसमें केवल कुछ महिलाओं की भागीदारी थी, लेकिन समय के साथ समूह का विस्तार हुआ। वर्तमान में इस समूह से लगभग 70 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उत्पादन कार्य में भाग ले रही हैं। समूह के विस्तार के साथ कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया गया है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हुई है।
उत्पादों की विविधता और बाजार में मांग
समूह द्वारा वर्तमान में लगभग 60 प्रकार की चटनियां और अचार तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें कटहल, सहजन, करेला, नींबू, गाजर, आम, आंवला और जामुन जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों तक की जा रही है। बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे उत्पादन और वितरण दोनों क्षेत्रों में विस्तार देखने को मिला है।
आय और रोजगार की स्थिति
इस उद्यम के माध्यम से सभी खर्चों को निकालने के बाद प्रतिमाह लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही समूह के जरिए पांच महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया गया है। अन्य सदस्य भी उत्पादन और विपणन से जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।
मेलों और बाहरी बाजारों तक पहुंच
समूह द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री विभिन्न मेलों और आयोजनों के माध्यम से की जा रही है। सरस मेला, श्री चिंतपूर्णी मेला और राज्यस्तरीय हरोली उत्सव जैसे आयोजनों में स्टॉल लगाकर उत्पादों का विपणन किया गया है। इन आयोजनों के दौरान प्रत्येक मेले में लगभग दो से ढाई लाख रुपये तक का कारोबार दर्ज किया गया है। इसके अलावा उत्पादों की आपूर्ति गुरुग्राम सहित अन्य शहरों तक भी की जा रही है, जिससे बाजार का दायरा बढ़ा है।
सरकारी सहयोग और योजनाओं की भूमिका
इस कार्य को आगे बढ़ाने में सरकारी योजनाओं का भी योगदान रहा है। वर्ष 2015 में समूह को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जोड़ा गया, जिसके बाद वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ। 35 हजार रुपये के रिवॉल्विंग फंड का उपयोग कर मशीनरी खरीदी गई, जिससे उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाया गया और कार्यक्षमता में वृद्धि हुई।
विपणन व्यवस्था और प्रशासन की पहल
वर्तमान में उत्पादों की बिक्री हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों जैसे शिवबाड़ी गगरेट, शिमला, ततापानी, कुफरी और चंबा में आउटलेट के माध्यम से की जा रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन ऑर्डर और कुरियर सुविधा के जरिए देश के अन्य हिस्सों तक भी आपूर्ति की जा रही है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे समूहों की आय और भागीदारी दोनों में वृद्धि हो रही है।
