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ऊना में 2 फरवरी को यूजीसी कानून के विरोध में करेंगे विशाल प्रदर्शन

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 30 Jan 2026 • 1 Min Read

यूजीसी कानून के विरोध में ऊना में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं। विभिन्न वर्गों के लोगों ने इसे जनहित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए अधिक भागीदारी की अपील की है।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

रणनीतिक बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तैयार

जिला ऊना में 2 फरवरी 2026 को यूजीसी कानून के विरोध में प्रस्तावित विशाल प्रदर्शन को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। इसी कड़ी में बड़ूही स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में स्वर्ण समाज की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में समाज के गणमान्य व्यक्तियों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर आंदोलन को सफल बनाने पर विचार-विमर्श किया।

विभिन्न वक्ताओं ने रखे अपने विचार

बैठक में पूर्व ग्राम पंचायत प्रधान पवन ठाकुर, यति सत्य देवानंद सरस्वती, सतवीर ठाकुर और सुरजीत सिंह राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके अलावा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए स्वर्ण समाज के लोगों ने भी बैठक में सहभागिता की और यूजीसी कानून को जनविरोधी बताते हुए इसके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

कानून के प्रभावों पर जताई चिंता

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व ग्राम पंचायत प्रधान पवन ठाकुर ने कहा कि यूजीसी कानून आम जनता के हितों के खिलाफ है। उन्होंने विशेष रूप से छात्रों, शिक्षण संस्थानों और सनातन समाज पर इसके पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकृत करने का प्रयास है, जिससे स्थानीय शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून पर फिलहाल रोक लगाई गई है, लेकिन जब तक इस कानून को पूरी तरह से वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अधिक संख्या में पहुंचने की अपील

उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि वे 2 फरवरी 2026 को ऊना में होने वाले प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद करें और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाएं। बैठक में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि यदि समय रहते इस कानून के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई तो आने वाले समय में देश की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।

शांतिपूर्ण आंदोलन पर दिया जोर

यति सत्य देवानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और सनातन संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। किसी भी ऐसे कानून का विरोध आवश्यक है जो समाज की मूल परंपराओं और मूल्यों पर आघात करता हो। उन्होंने शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की अपील की। बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी। साथ ही 2 फरवरी को ऊना में होने वाले प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने के लिए गांव-गांव जाकर जनसंपर्क करने और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की रणनीति भी तय की गई।