Himachalnow / सिरमौर
हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा और कांगड़ा की औषधीय जड़ी-बूटियों के महत्व को समझने और उनका अध्ययन करने के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आए 16 सदस्यीय दल ने दौरा किया। इस दौरान दल ने जंगलों का भ्रमण कर इलेक्ट्रो होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति में उपयोगी लगभग 20 बहुमूल्य जड़ी-बूटियों की जानकारी जुटाई।
शोध का केंद्र: चंबा स्थित रवी सन इंडिया रिसर्च सेंटर
रवी सन इंडिया के अध्यक्ष ने बताया कि चंबा के रिसर्च सेंटर में पूरे भारत से चिकित्सक समय-समय पर जड़ी-बूटियों पर शोध करने आते हैं। अब तक होमियोपैथी चिकित्सा प्रणाली में उपयोग की जाने वाली 114 जड़ी-बूटियों का अवलोकन किया जा चुका है।
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हिमाचल की आर्थिकी को मिलेगी मजबूती
अध्यक्ष ने कहा कि इन जड़ी-बूटियों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश न केवल ख्याति प्राप्त कर सकता है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सकता है। उनका कहना है, “अगर हिमाचल सरकार इस दिशा में मदद करे और रिसर्च को मान्यता प्रदान करे, तो अगले कुछ सालों में यह क्षेत्र 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व उत्पन्न कर सकता है।”
इलेक्ट्रो होमियोपैथी का भविष्य
अध्यक्ष ने बताया कि इलेक्ट्रो होमियोपैथी के तहत पूरे भारत में 5 लाख डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिनमें से 15,000 डॉक्टर रवी रिसर्च सेंटर से जुड़कर रोगों के उपचार में सहायता कर रहे हैं। हालांकि, रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सीमित संसाधन होने के कारण यह कार्य अभी सीमित दायरे में ही हो पा रहा है।
आवश्यकता: सरकार की पहल और सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश की औषधीय जड़ी-बूटियां प्रदेश के विकास का आधार बन सकती हैं। अगर इस क्षेत्र में सही निवेश और प्रोत्साहन मिले, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम है।
हिमाचल की औषधीय जड़ी-बूटियों का अध्ययन और उनके व्यावसायिक उपयोग से प्रदेश की छवि और राजस्व में बड़ा बदलाव आ सकता है। इलेक्ट्रो होमियोपैथी की इस पहल को सरकार और स्थानीय लोगों के सहयोग की जरूरत है, ताकि यह क्षेत्र प्रदेश के लिए आय का मजबूत स्रोत बन सके।
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