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औषधीय व सुगंधित पौधों से जैव विविधता संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम

By हिमांचलनाउ डेस्क नाहन Published: 16 Mar 2026, 6:19 PM | Updated: 16 Mar 2026, 6:19 PM 0 min read

इटरनल यूनिवर्सिटी बरू साहिब में औषधीय और सुगंधित पौधों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जैव विविधता के महत्व और औषधीय पौधों की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई।

राजगढ़

जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

इटरनल यूनिवर्सिटी बरू साहिब में ग्रीन इनोवेशन क्लब द्वारा इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से औषधीय एवं सुगंधित पौधों द्वारा जैव विविधता संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण के महत्व और औषधीय पौधों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

स्वागत संबोधन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रीन इनोवेशन क्लब के संयोजक डॉ. अमित सौरभ के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि औषधीय पौधों के संरक्षण और उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना आज समय की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता ने दी विस्तृत जानकारी

इस अवसर पर अकाल कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राकेश जोशी ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने जैव विविधता की अवधारणा, उसके महत्व और संरक्षण के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही औषधीय और सुगंधित पौधों की जैव विविधता संरक्षण में भूमिका तथा सतत आजीविका को बढ़ावा देने में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला।

हर्बल गार्डन का किया भ्रमण

कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के हर्बल गार्डन का भ्रमण भी किया। इस दौरान जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी राजेंद्र ने विद्यार्थियों को विभिन्न औषधीय पौधों और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी तथा उनका प्रदर्शन किया। इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की जैव विविधता को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।

95 विद्यार्थियों ने की भागीदारी

कार्यक्रम में कुल 95 विद्यार्थियों ने संकाय सदस्यों के साथ सक्रिय भागीदारी की। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा औषधीय पौधों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करना है।