HNN/ शिमला
समाचार पत्र की कतरनों पर नौ मास बाद विकास खंड मशोबरा द्वारा जांच किए जाने को पीरन पंचायत के पूर्व प्रधान दयाराम वर्मा और प्रीतम ठाकुर ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होने विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए हैं कि विभाग ने नौ मास तक उनके बयान पर कार्यवाही क्यों नहीं की है। उन्होने बताया कि नौ मास बाद तथ्यों की जांच करने का कोई औचित्य नहीं रहता है। उन्होने जांच अधिकारी द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों से तथ्यों की पुष्टि न करने की बजाए उनके मुलजिमों की तरह बयान दर्ज करवाने पर भी आपति जताई है।
बता दें कि मशोबरा ब्लाॅक की अंतिम छोर की पीरन पंचायत की समस्याओं को लेकर 09 मई 2022 को समाचार प्रकाशित हुआ था जिसकी कतरनों पर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम सरकार ने त्वरित कार्यवाही करते हुए उपायुक्त शिमला के माध्यम से खंड विकास अधिकारी मशोबरा को वास्तु स्थिति से अवगत करवाने बारे भेजा गया। बीडीओ मशोबरा ने अपने अधीनस्थ कार्य करने वाले एसईबीपीओ की तथ्य जानने के लिए ड्यूटी लगा दी।
नौ मास उपरांत आनन फानन में 18 जनवरी 2023 को बीडीओ मशोबरा कार्यालय के एसईबीपीओं कामराज ठाकुर ग्राम पंचायत पीरन कार्यालय पहुंचे। उन्होने पंचायत से तथ्यों की पुष्टि करने के बजाए मीडिया में मुद्दे को उजागर करने वाले दो व्यक्तियों को तलब कर दिया और उनके बयान दर्ज कर दिए। पूर्व प्रधान दयाराम वर्मा और प्रीतम ठाकुर ने बताया कि जन समस्याओं को मिडिया में उजागर करना हर नागरिक का अधिकार है और जिस प्रकार उन्हें समस्या उजागर करने पर जलील किया गया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
इनका कहना है कि नौ महीने बाद विकास संबधी जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। उन्होने सरकार से मांग की है कि नौ माह तक इंक्वायरी लंबित करने पर संबधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। दया राम वर्मा का कहना है कि मिडिया ही एक ऐसा माध्यम है जहां पर लोग अपनी समस्याओं को निर्भय होकर रख सकते हैं।

