कांग्रेस नेताओं को अपने बच्चों की चिंता कम और हर्षवर्धन चौहान की चिंता ज्यादा- रावत
HNN/ नाहन
सिरमौर भाजपा के जिला सह मीडिया प्रभारी प्रताप सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान करते हुए बताया कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता कम है और हाटी विरोधी नेता हर्षवर्धन चौहान की चिंता ज्यादा है।
रावत ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं से सवाल करते हुए पूछा है कि अगर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान को आपके और हमारे बच्चों की चिंता होती तो जैसे ही केंद्र सरकार ने एसटी बिल को पारित करने के लिए प्रदेश सरकार को भेजा था तो उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान का फर्ज बनता था कि वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ मिलकर इस बिल को मंजूरी प्रदान करवाते।
लेकिन उनको आपके और हमारे बच्चों की चिंता कम है और अपने कुर्सी की चिंता ज्यादा है। रावत ने बताया कि हर्षवर्धन चौहान का परिवार पहले से ही हाटी विरोधी रहा है। उन्होंने बताया कि यदि हर्षवर्धन चौहान के स्वर्गीय पिता ठाकुर गुमान सिंह चाहते तो गिरी पार क्षेत्र को भी जौनसार बाबर के साथ सन 1967 में ही जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिल जाता है।
लेकिन वह नहीं चाहते थे इसके पीछे उनकी यह मंशा थी कि यदि गिरी पार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिल जाता है तो यहां के लोग उच्च पदों पर बैठेंगे फिर हमें कोई नहीं पूछेगा। हर्षवर्धन चौहान भी इसी नीति पर काम कर रहे हैं। इसलिए हमें पार्टी से ऊपर उठकर ऐसे नेता का डटकर विरोध करना चाहिए और हमें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए चाहिए।
रावत ने बताया कि यदि शिलाई के पूर्व विधायक बलदेव सिंह तोमर के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ मधुर संबंध नहीं होते तो गिरी पार क्षेत्र के लोगों को कभी भी एसटी का दर्जा नहीं मिलना था।
रावत ने कहा कि हम इसके लिए देश के पीएम नरेंद्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल, लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार, पूर्व ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी, रीना कश्यप एवं शिलाई के पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता बलदेव सिंह तोमर का विशेष आभार प्रकट करना चाहते हैं जिनके अथक प्रयासों से गिरी पार क्षेत्र को एसटी का दर्जा मिला है।