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कोली समाज जिला कांगड़ा इकाई की कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न

Ankita • 8 May 2023 • 1 Min Read

HNN/ कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश कोली समाज पंजीकृत सम्बंधित अखिल भारतीय कोली समाज पंजीकृत की जिला कांगड़ा इकाई की कार्यकारिणी की बैठक जिलाध्यक्ष काली दास की अध्यक्षता में दुर्गा माता मंदिर घरलूं भुआणा तहसील पंचरुखी में सम्पन्न हुई। महासचिव मंजीत डोगरा ने मंच का संचालन किया।

उपस्थित सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे कि किस तरह समाज के उत्थान के लिए कार्य किया जाए ताकि समाज के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके। वैठक का मुख्य एजेंडा शिमला जिला के रोहडू में होने वाले राज्य स्तरीय सम्मेलन रहा।

जिसमें मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुखू मुख्य अतिथि होंगे तथा समाज के बच्चो के भविष्य के लिए शिक्षा व स्वास्थ्य पर विशेष जोर डाला गया। शिक्षा और स्वास्थ्य ही एक ऐसा धन है जिसे ना कोई चुरा सकता ना ही कोई बांट सकता। समाज में फैली कुरीतियों जैसे शादियों में कपड़े के लेन-देन, अनावश्यक हारों का पहनाना जो 1000 रुपए वाला हार 1500 रुपए में मिलता है, क्यों ना 1500 रुपए का शगुन दे दिया जाए।

इसी तरह स्वर्गवास के वाद अनावश्यक कपड़ा शव के उपर जला देना, उस पैसे को पीड़ित परिवार को दे कर सहायता की जा सकती है। बैठक में एक पैंशन सैल का गठन किया गया जिसका अध्यक्ष कृष्ण चन्द रिटायर अधीक्षक ग्रेड-1 को बनाया गया। जिलाध्यक्ष काली दास ने गठित किए गए समाज के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, युवा विंग व महिला विंग तथा जिला कार्यकारिणी के लिए एक वर्षीय कार्य योजना का प्रस्ताव रखा जिसे सर्व सम्मति से पास करके लिखित रूप में सभी इकाईयों के अध्यक्षों को कार्य योजना दी गई।

इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी का विस्तार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित प्रस्ताव पास किए गए। जिला व सभी इकाईयों की बैठक कम से कम 3 माह में एक बार आवश्य की जाएगी, जिसमें कार्य योजना की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। समाज के लिए ‘कोली कल्याण भवन ‘ के निर्माण के लिए जमीन दान करने या समाज के नाम पर जमीन हस्तांतरित करने के लिए प्रयास करना।

चंगर धार क्षेत्र टमबर तिनबड व कोसरी में सरकारी डीग्री कॉलेज, नर्सिंग कालेज या फार्मा आदि का शिक्षण संस्थान खोलने के प्रयास करना व तव तक आवाज उठाते रहना जव तक यह मांग पुरी नहीं हो जाती। पालमपुर से जयसिंहपुर तक 40 किलोमीटर मे अधिकतर संख्या कोली समाज के लोग हैं। जिससे कोली समाज के साथ-साथ सभी समाज के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार मिल सके।