जंगल में गिरे मवेशी की जान बचाने के लिए चार घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
कांडो गांव के युवाओं ने डंडों पर उठाकर जंगल से गोशाला पहुंचाया बैल
HNN/ नाहन
जिला सिरमौर के धारटीधार इलाके की नावणी (जमटा) पंचायत के युवाओं ने चार घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर एक बेजुबान मवेशी की जान बचा ली। इन युवाओं ने रात के घुप अंधेरे के बीच न सिर्फ बैल को जंगल से सुरक्षित सड़क तक पहुंचाया, बल्कि डंडों पर उठाकर उसे डेढ़ किलोमीटर दूर गोशाला तक भी पहुंचा दिया। युवाओं के इस हौसले की खूब सराहना हो रही है।

दरअसल, नावणी (जमटा) पंचायत के कांडो गांव के इंद्र सिंह का बैल जंगल में किसी बेल में फंसकर गिर गया था। इसकी जानकारी मिलते ही गांव के युवा मौके पर पहुंचे। लोगों ने उसे उठाने के प्रयास किए, लेकिन वह चलने-फिरने में असमर्थ था। फिर क्या, गांव के नौजवानों ने बड़ा जोखिम लेकर बैल को रस्सियों से बांधकर सड़क तक पहुंचाने की ठान ली।
हालांकि, ये कार्य इतना आसान नहीं था। 700 किलोग्राम से ज्यादा वजनी बैल को खाई से बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाना टेडी खीर था, लेकिन युवाओं ने हौसला नहीं टूटने दिया. गांव से रस्से मंगवाए गए। युवाओं ने पहले दो बड़े डंडों में रस्से बांधे। इसके बाद बैल को कड़ी मशक्कत से इन डंडों पर रखा और उसे भी रस्सों से बांधा गया, जिससे वह चढ़ाई में नीचे न गिरे।
ग्रामीणों का ये प्रयास सफल रहा और बैल को सड़क तक पहुंचा दिया। मवेशी को सड़क तक सुरक्षित पहुंचाने के बाद लोगों ने उसे गाड़ी से गांव तक ले जाने के लिए वाहन मालिकों को फोन किए, लेकिन कहीं से वाहन का इंतजाम नहीं हो सका। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे कंधों पर उठाकर गांव तक पहुंचाने का मन बना लिया और इस कार्य में वह कामयाब भी हुए।
बैल को डंडों के सहारे ले जाना काफी मुश्किल कार्य था। बैल को उठाने के लिए एक के बाद एक युवा अपना कांधा देते गए और उसे गोशाला तक पहुंचाकर ही दम लिया। इस कार्य में काफी बड़ा जोखिम था, लेकिन युवाओं के हौसलों ने इसे अंजाम तक पहुंचा दिया।
गोशाला के बाहर जैसे ही बैल को नीचे रख उसके शरीर से रस्से खोले गए तो वह अचानक हरकत में आ गया। इससे पहले बैल की हालत देख नहीं लग रहा था कि वह फिर उठ पाएगा। गोशाला में पहुंचकर उसे चारा डाला गया तो वह चरने लगा। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस कार्य में गांव के डेढ़ दर्जन युवाओं ने सहयोग दिया।