जातिगत जनगणना: 2026में हिमाचल सहित यहां से होगी शुरुआत
आज़ादी के बाद पहली बार देश में होगी व्यापक जाति गणना; हिमाचल समेत 4 पहाड़ी राज्यों से पहले चरण का आगाज़
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नई दिल्ली
दशकों से चले आ रहे सियासी विमर्श और सामाजिक समानता की मांग के बीच, केंद्र सरकार ने आख़िरकार राष्ट्रीय जातिगत जनगणना की तारीखों का ऐलान कर दिया है। यह ऐतिहासिक कवायद दो चरणों में पूरी की जाएगी, जिसका मक़सद देश में प्रत्येक धर्म और वर्ग की जातियों की संख्या का सटीक आकलन करना है।
इस बार जनगणना में डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे डेटा संग्रहण अधिक सटीक और तेज़ होने की उम्मीद है।
पहाड़ों से होगा आगाज़
जनगणना का पहला चरण 1 अक्तूबर, 2026 से शुरू होगा, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख जैसे चार पहाड़ी राज्यों को शामिल किया जाएगा।
इसके बाद, 1 मार्च, 2027 से देश के अन्य हिस्सों में दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस पूरी कवायद को लगभग तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जनगणना की औपचारिक अधिसूचना 16 जून को जारी होने की संभावना है।
आंकड़ों से खुलेगी तस्वीर
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस जनगणना के दौरान न केवल आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे, बल्कि देश में विभिन्न जातियों की वास्तविक संख्या भी सामने आएगी। यह जानकारी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर आरक्षण की 50 फीसदी सीमा पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
अंतिम बार जातिगत गणना 1931 में हुई थी, जिसमें केवल हिंदू जातियों के आंकड़े जुटाए गए थे। इस बार धर्म परिवर्तन से जुड़े आंकड़े भी एकत्र करने की तैयारी है।
विलंब के बावजूद व्यापक तैयारियां
निर्धारित समय (2021) से पांच साल बाद हो रही यह जनगणना कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। हालांकि, अब सरकार पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। इस बार पर्यवेक्षक मोबाइल ऐप और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग करेंगे, जो डेटा की सटीकता और गति सुनिश्चित करेगा।
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना में भी जाति और उपजातियों का सर्वेक्षण करने का प्रयास किया गया था, लेकिन तब करीब 38 लाख जातियों और उपजातियों के आंकड़े सामने आने से एक जटिल स्थिति बन गई थी। बरहाल उम्मीद है कि इस बार की डिजिटल जनगणना इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लेगी।