HNN/ बिलासपुर
पुरानी पंरम्पराओं के अनुरूप विवाह अथवा अनुष्ठान में निमन्त्रण के लिए बबरूआं रा छडोलू लेकर जाते थे। सम्भवतः इसके पीछे मनशा यह रही होगी कि मिठाई के रूप में बबरूओं की पौष्टिकता और बनाने वाली की मेहनत दिखती थी। क्योंकि रास्ते लम्बे व दुर्गम होते थे शादी की तैयारियां के चलते आमन्त्रित व्यक्ति को आने के लिए अधिक परिश्रम न करने पड़े और रास्ते में खाने के लिए बबरू मिल सके। कालांतर में बबरूओं का स्थान मेवे और मिठाईयों ने ले लिया लेकिन यह प्रथा आज भी जारी है।
जिला निर्वाचन अधिकारी पंकज राय ने पुरानी पंरम्परा को अपनाते हुए अपनी लोक संस्कृति को संजो कर रखने के प्रयास के तहत मतदान उत्सव को करवाने जाने वाली मतदान टोली को रवाना करने से पहले स्वास्थ्य टोकरी देने का निर्णय लिया है जिसे सेहता रा छडोलु नाम दिया गया है। सियुल के लड्डु, सुखे मेवे व अन्य पदार्थो से भरा यह छडोलु मतदान टोलियों के लिए एक नई पहल है।
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रास्ते में भूख लगने पर सुखे मेवे और सियुल के लडडु न केवल मतदान टोलियों की भूख मिटाएंगी बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता की अनुकूलता को बनाए रखेगें। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा भी पोलिंग पार्टियों की व्यवस्था व सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए कडे निर्देश जारी किये हुए है जिसके तहत यह निर्णय लिया गया है। मतदान प्रक्रिया की पुर्ति के लिए मतदान टोली का योगदान अहम है। विभिन्न क्षेत्रों में जाकर मतदान के कार्यो को अंजाम देना टोली का दायित्व है।
रास्ता दुर्गम हो या आसान मतदान केन्द्रों पर पंहुच कर अपने कार्य को चुस्ती व दरूस्ती से पूर्ण किया जाता है। सफर के दौरान टोली में ताजगी बनी रहे और सेहत पर भी कोई विपरीत प्रभाव न पडे इसके लिए भी यह सेहता रा छडोलू उनके सफर का अभिन्न साथी बनकर साथ चलेगा। मतदान टोली में पीठासीन अधिकारी, सहायक पीठासीन अधिकारी, दो मतदान अधिकारी व दो सुरक्षा कर्मियों सहित कुल छः अधिकारी व कर्मी सम्मलित होते है।
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