HNN / बिलासपुर
बिलासपुर जिला में कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है, यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि जिला बिलासपुर में 12 कुछ रोगियों का इलाज चल रहा है इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा सतर्कता बरतते हुए गत वर्ष अप्रैल 2022 से 30 दिसंबर 2022 तक 8 कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है जिनका भी इलाज शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि यह रोग माइक्रो बैक्टीरियम लैपरी के कारण होता है और अभी भी इसके विषाणु अब भी वातावरण में व्याप्त है। इस रोग के कारण व्यक्ति के त्वचा में हल्के पीले रंग के दाग, शरीर के किसी भाग में नसों का मोटा होना, हाथों की उंगलियों में पकड़ कम होना आंखों की पलकों का बंद ना होना भोहो के बालों का कम होना, शरीर के घाव का लंबे समय तक ठीक ना होना इत्यादि प्रमुख लक्षण होते हैं।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग कुष्ठ रोग के लक्षणों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने जिला वासियों से अपील करते हुए कहा है कि अगर किसी भी व्यक्ति में इस प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। उन्होंने बताया कि समय पर चिकित्सक को दिखाने पर कुष्ठ रोग रोग का इलाज 6 माह से 1 वर्ष के बीच संभव है। इस रोग का समय पर जांच करवाने पर किसी भी प्रकार की अपंगता से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित किसी भी व्यक्तियों को ढूंढ कर लाने और उनका इलाज करवाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को 250 रुपए प्रति रोगी मिलता है और यदि रोगी को डिफॉरमेटी के साथ अस्पताल लाया जाता है तो उसे 200 रुपए प्रति रोगी मिलता है। यदि आशा कार्यकर्ता मल्टी बेसीलरी रोगी की पूरी ट्रीटमेंट 12 महीने में पूरा करवाती है तो उसे प्रोत्साहन राशि के रूप में 600 रुपए दिए जाते हैं।
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