कांगड़ा में एचआईवी नियंत्रण को लेकर जिला स्तरीय बैठक, एडीसी विनय कुमार ने दिए समन्वित प्रयासों पर जोर
जिला कांगड़ा में एचआईवी एड्स नियंत्रण एवं जागरूकता को लेकर जिला स्तरीय परामर्श बैठक अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, जागरूकता गतिविधियों, उपचार सेवाओं के विस्तार तथा विभागीय समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई, साथ ही वर्तमान स्थिति और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
कांगड़ा
जिला स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन
जिला कांगड़ा में जिला एड्स निवारण एवं नियंत्रण समिति (डीएपीसीसी) तथा भेदभाव उन्मूलन, कानूनी संरक्षण एवं मुख्यधारा से जोड़ने संबंधी विषयों पर जिला स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने तथा उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
जागरूकता, जांच और उपचार पर समन्वित फोकस
अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने कहा कि एचआईवी एड्स केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि जिले में जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार को एक साथ आगे बढ़ाकर ही संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि माता से शिशु में संक्रमण के मामलों को रोका जा सके। साथ ही उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से एड्स मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
जिले की एचआईवी स्थिति और स्वास्थ्य ढांचा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. विवेक करोल ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिले के आईसीटीसी केंद्रों में कुल 216 एचआईवी पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 168 पुरुष, 46 महिलाएं और 2 ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। जिले में वर्तमान में 9 आईसीटीसी केंद्र, 3 डीएसआरसी, 1 एआरटी केंद्र, 2 ओएसटी केंद्र और 98 रेड रिबन क्लब संचालित हैं, जो जांच, परामर्श, उपचार और जागरूकता गतिविधियों को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को उपचार सेवाओं से जोड़ा जा चुका है, जिससे रोग प्रबंधन में सुधार हो रहा है।
राष्ट्रीय लक्ष्य और प्रगति समीक्षा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आरके सूद ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के तहत वर्ष 2027 तक एचआईवी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत एचआईवी अनुमान-2025 रिपोर्ट के अनुसार जिला कांगड़ा में अनुमानित 2,256 संक्रमित व्यक्ति हैं, जिनमें से 2,119 व्यक्ति वर्तमान में उपचाराधीन हैं। इनमें 1,456 मरीजों में वायरल लोड नियंत्रण की स्थिति दर्ज की गई है, जो उपचार कार्यक्रमों की प्रगति को दर्शाती है।