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तीन दशक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुईं जेबीटी मधु चौहान

Shailesh Saini • 59 Mins Ago • 1 Min Read

दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में कर्तव्यनिष्ठा से निभाई जिम्मेदारी, पढ़ाए विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में दे रहे सेवाएं

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

शिक्षा खंड सुरला के तहत राजकीय प्रारंभिक पाठशाला टेड़ी बरोटी में कनिष्ठ बुनियादी शिक्षक (जेबीटी) के पद पर सेवाएं दे रहीं मधु चौहान करीब तीन दशक की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हो गईं। उनकी सेवानिवृत्ति पर परिजनों, रिश्तेदारों और पारिवारिक मित्रों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए स्वस्थ, सुखमय और समृद्ध भविष्य की कामना की।

मधु चौहान ने वर्ष 1996 में शिक्षा खंड सुरला के राजकीय प्रारंभिक पाठशाला मोहलिया कटोला से अपनी सरकारी सेवा की शुरुआत की थी। करीब चार माह बाद उनका स्थानांतरण राजकीय प्रारंभिक पाठशाला जामन वाला में हुआ। यह क्षेत्र उस समय दुर्गम इलाकों में शामिल था और स्कूल तक पहुंचने के लिए नदी के रास्ते का सहारा लेना पड़ता था।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने समय की पाबंदी, कर्तव्यनिष्ठा और मेहनत को प्राथमिकता देते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान की।सेवा काल के दौरान उन्होंने संगड़ाह खंड के लोहारा टिक्करी, सुरला खंड के खैरी, सैनवाला और मोगी नंद तथा नाहन खंड के बोहलियों सहित विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दीं।

जामन वाला, लोहारा टिक्करी और टेड़ी बरोटी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम के बीच स्कूल पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सहयोग से उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निरंतर निर्वहन किया।मधु चौहान के अनुसार उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेक विद्यार्थी आज सरकारी सेवाओं सहित विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

उनके लिए शिक्षिका के रूप में विद्यार्थियों को आगे बढ़ते देखना सबसे बड़ी संतुष्टि रही।मधु चौहान का मायका मोगी नंद पंचायत के अंतर्गत आने वाले दुर्गम गांव नीम वाली में है। उन्होंने बताया कि बचपन के समय गांव से उच्च शिक्षा के लिए नाहन पहुंचना काफी कठिन था।

गांव को तीन ओर से सलानी खड्ड ने घेरा हुआ था, जबकि एक ओर घना जंगल था। बस तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों और खड्ड को पार करना पड़ता था तथा परिवहन की सुविधा भी सीमित थी। इन्हीं परिस्थितियों के बीच शिक्षा हासिल करने के संघर्ष ने उनके जीवन में अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में काम करने का जज्बा मजबूत किया।

मधु चौहान के पिता स्वर्गीय राजेंद्र सिंह ठाकुर पुलिस विभाग में निरीक्षक रहे, जबकि पति नरजीत सिंह चौहान सेना में हवलदार के पद पर सेवाएं देने के बाद शिक्षा विभाग में शास्त्री के पद से सेवानिवृत्त हुए। मधु चौहान के अनुसार पिता और पति से उन्हें अनुशासन, समय की पाबंदी और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिली।मधु चौहान का ससुराल आम्ब वाला में है।

उनकी बेटी नंदिता ठाकुर डीएवी पब्लिक स्कूल पांवटा साहिब में जीवविज्ञान एवं रसायन विज्ञान की अध्यापिका हैं, जबकि उनका पुत्र मोगी नंद क्षेत्र की एक फार्मा कंपनी में गुणवत्ता अधिकारी के रूप में कार्यरत है।करीब 30 वर्ष की सेवा के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाली मधु चौहान के सेवानिवृत्त होने पर क्षेत्रवासियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी तथा उनके स्वस्थ एवं सुखमय भविष्य की कामना की।