HNN/ मंडी
जिला मंडी के रिवालसर में नांलदा बौद्ध परंपरा की भारतीय हिमालयी परिषद द्वारा नालंदा भारतीय बौद्ध धर्म के विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्व, बागवानी व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर अपने संबोधन में जगत सिंह नेगी ने कहा कि मुझे गुरू पदमसंभव की पवित्र स्थली रिवालसर में नालंदा परंपरा पर आयोजित सम्मेलन में इसकी उपयोगिता को जानने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की आस्था आज पूरे विश्व में है और आज यह विकसित दुनिया में सबसे अधिक अध्ययन और अनुसरण किए जाने वाले धर्मों में से एक है। बौद्ध धर्म क्रोध पर विजय पाने तथा सभी को शांति का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अनेक धर्म है तथा सभी को अपने-अपने धर्म को मानने तथा उसका प्रचार व प्रसार करने का अधिकार है। वहीं हमारे संविधान में बौद्ध धर्म को भी प्रसार करने का अधिकार है।
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उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में धर्म गुरूओं द्वारा अपने उपदेश दिए जायेंगे जिसका फायदा हमें आने वाले समय में देखने को मिलेगा। राजस्व, बागवानी व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि गौतम बुद्ध प्राचीन भारत के एक तपस्वी और आध्यात्मिक शिक्षक थे, जो 5वीं व 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान रहते थे तथा उन्होंने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने भारतीय बौद्ध परंपरा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने के लिए आयोजकों को बधाई दी तथा अपनी ऐच्छिक निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की।
विधायक रवि ठाकुर ने इस अवसर पर नालंदा परम्परा को आगे बढ़ाने तथा बौद्ध धर्म के रास्ते पर चलने का सभी से आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धर्म गुरूओं का आर्शीवाद लेकर हम सभी को विश्व शांति की ओर अग्रसर होना होगा। उन्होंने आयोजन समिति को अपनी ऐच्छिक निधि से 3 लाख रुपये देने की घोषणा की। कार्यक्रम में नांलदा बौद्ध परंपरा की भारतीय हिमालयी परिषद के अध्यक्ष टी.के. लोचेन तुलकू रिनपोछे ने कहा कि बौद्ध भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हो चुकी है तथा राष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध स्कूलों को मान्यता लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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