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नाहन अघोरी कुटिया में शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा, निकाली गई भव्य कलश यात्रा

PRIYANKA THAKUR | 1 दिसंबर 2022 at 2:06 pm

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नाहन अघोरी कुटी में विराजमान होंगे बाबा बालक नाथ के साथ अघोरी जी, मूर्तियों की ऐसे होगी प्राण प्रतिष्ठा ……

HNN / नाहन

जिला सिरमौर के दिव्य सिद्धपीठ अघोरी कुटी नाहन में आज वीरवार से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ है। अपने गुरु का आशीर्वाद लेकर महंत शिवदत्त गिरी जी महाराज के द्वारा सिद्ध शक्तिपीठ पर बाबा बालक नाथ जी की मूर्ति स्थापना का भी निर्णय लिया गया है। महंत शिवदत्त गिरी जी के अनुसार 5 दिसंबर को वैदिक पद्धति से दिव्य अनुभूतियों के साथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। वही, आज वीरवार से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ किया गया है।

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भागवत कथा के शुभारंभ से पहले 9:00 बजे भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई। इस कलश यात्रा में भारी संख्या में मातृ शक्ति के द्वारा भाग लिया गया। जिसमें बलविंदर कौर, कुलविंदर कौर, रेणुका भारती, धर्मी देवी, दीपिका राणा, किरण, सरोज राणा, नीतू कश्यप, विनीता कश्यप आदि मुख्य रूप से शामिल रही। वही, महंत हरिओम गिरी ने बताया कि 5 दिसंबर को बाबा बालक नाथ जी की मूर्ति सहित शिव परिवार अघोरी जी महाराज आदि की नगर परिक्रमा भी होगी।

बड़ी बात तो यह है कि यह पहला अवसर होगा, जब इस सिद्ध शक्ति दिव्य पीठ पर बाबा अघोरी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। बता दें कि अघोरी बाबा रियासत काल से आजाद भारत के बाद तक नाहन की अघोरी कुटी में रहते थे। बताया जाता है कि वह एक चमत्कारिक अघोरी थे। जिनके चमत्कारों की पुष्टि दिग्यौण वाले निर्वाण जी और श्री रेणुका जी के निर्वाण ऋषि के द्वारा भी की जा चुकी है। बताया जाता है कि अघोरी बाबा बाघ शेर आदि का रूप भी धारण कर लेते थे।

यही नहीं चमत्कारिक रूप से वह एक स्थान से हजारों सैकड़ों मील दूर भी दर्शन दे देते थे। हालांकि हिमाचल नाउ न्यूज़ इन बातों की पुष्टि नहीं करता, मगर यह सही है कि आज भी कई सिद्ध पुरुषों और महात्माओं के द्वारा उनके चमत्कारिक किस्से दोहराए जाते हैं। महान हरिओम गिरी ने बताया कि कथा का समय प्रतिदिन 2:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि 7 दिसंबर को अटूट भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जिसमें संत समाज को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 7 तारीख को संत समागम में कई दिव्य संतो के पधारने की भी पूरी उम्मीद है। बता दें कि अघोरी कुटी के बारे में आज का युवा वर्ग कम जानता है। हरियाणा के एक भगत सुभाष का कहना है कि वह लंबे अरसे से बीमारी से ग्रस्त थे मगर जब से इस स्थान पर आए हैं, उनके घर में शांति है और जो छोटे मोटे रोग चले रहते थे उनसे भी निजात मिली है। कई ऐसे भगत हैं जिन्होंने इस स्थान के महत्व को दिव्य अनुभूति के साथ व्यक्त किया है।

यह दिव्य शक्ति पीठ काफी लंबे अरसे तक संत विहीन रहा। जिसके बाद महंत शिवदत्त गिरी ने इस धार्मिक स्थान का महत्व समझते हुए महात्मा हरिओम गिरी को इस विशेष स्थान की जिम्मेवारी सौंपी है। महात्मा हरिओम गिरी के द्वारा लगातार इस सिद्ध शक्तिपीठ का जीर्णोद्धार क्रमबद्ध जारी किया जा रहा है। इससे पूर्व बजरंगबली जी की मूर्ति की भी प्राण प्रतिष्ठा बड़े ही भव्य और दिव्य की जा चुकी है।

बता दें कि श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य व्यास पंडित सोमदत्त गिरी है जबकि उनके साथ पंडित प्रकाश वशिष्ट, विजय शर्मा, पंडित राम रतन और पंडित दयानंद आदि मुख्य रूप से शामिल है। आयोजित कार्यक्रम में भगत जय नारायण, नवनीत शर्मा, नरेश चंद्र अग्रवाल, बृजमोहन शर्मा, राजकुमार आदि ने मुख्य रूप से हिस्सा लिया।

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