नाहन में बिजली संकट से त्राहि-त्राहि, विभाग के मुख्य अधिकारी को पता ही नहीं कहां लग रहे कट
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी नाहन में अंधेरे के बीच पहुंचे, बोले- लगता है बिजली विभाग पर शासकीय नियंत्रण नहीं रहा
हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन
नाहन विधानसभा क्षेत्र में अघोषित बिजली कटों ने अब लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। बीते करीब एक महीने से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक घरेलू बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है और उपभोक्ताओं के अनुसार इस दौरान सैकड़ों कट लग चुके हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बिजली संकट अब आम जनजीवन की बड़ी समस्या बन चुका है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस समस्या से पूरा विधानसभा क्षेत्र जूझ रहा है, उसकी जानकारी बिजली विभाग के जिला स्तर के मुख्य अधिकारी को ही पूरी तरह नहीं है।
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र सिंह से बिजली कटों को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब था कि वह पूछकर बताएंगे कि बिजली के कट आखिर कहां लग रहे हैं। सवाल यह है कि जिस जिले में उपभोक्ता लगातार बिजली कटों की मार झेल रहे हों, जहां कर्मचारी रात-दिन फाल्ट ठीक करने के लिए दौड़ रहे हों और जहां महीनेभर में सैकड़ों बार बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हों, वहां विभाग के मुख्य अधिकारी को यह पता करने के लिए अपने अधीनस्थ अधिकारियों से पूछना पड़ रहा है कि कट कहां लग रहे हैं। यह स्थिति बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था पर ही गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार देर शाम नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जब नाहन शहर में एक पार्षद के घर प्रीतिभोज में शामिल होने जा रहे थे तो ऐन वक्त पर बिजली गुल हो गई। नेता प्रतिपक्ष और उनके साथ पहुंचे भाजपा नेताओं को मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे अंधेरे में ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना पड़ा। इसी दौरान जयराम ठाकुर के मुंह से भी यह बात निकली कि लगता है नाहन में बिजली विभाग पर शासकीय नियंत्रण नहीं रहा है। यह घटना उस समय सामने आई है जब नाहन की जनता पिछले लंबे समय से बार-बार होने वाले बिजली कटों को लेकर परेशान है।
उधर, नाहन में बिजली व्यवस्था सुधारने को लेकर विधायक की ओर से समय-समय पर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उन दावों से अलग दिखाई दे रही है। यदि बिजली व्यवस्था में वास्तव में सुधार हुआ है तो फिर घरेलू उपभोक्ताओं को लगातार अघोषित कटों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? आखिर ऐसी कौन सी व्यवस्था है जिसके तहत बिजली कटों की समस्या महीनों से बनी हुई है और विभाग इसका स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है?
बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत भारी भरकम राशि उपलब्ध होने के बावजूद नाहन की स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं नाहन के पूर्व विधायक डॉ. राजीव बिंदल भी बिजली समस्या को लेकर कई बार शासन और प्रशासन के समक्ष मामला उठा चुके हैं। इसके बावजूद बार-बार बिजली गुल होने का सिलसिला थम नहीं रहा है।
सबसे बड़ी परेशानी स्कूली बच्चों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उठानी पड़ रही है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो अस्पतालों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से मरीजों और तीमारदारों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। व्यापारियों और आम घरेलू उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली गुल होने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह भी है कि विभाग के कर्मचारी अक्सर आधी रात को भी जंगलों और दुर्गम इलाकों में पहुंचकर बिजली की लाइनों को ठीक करते नजर आते हैं। भारी बारिश और खराब मौसम के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर लाइनें दुरुस्त करने वाले कर्मचारियों की मेहनत के बावजूद यदि समस्या लगातार बनी हुई है तो सवाल फील्ड कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर उठना स्वाभाविक है जो समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाल पा रही।
अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र सिंह का कहना है कि फिलहाल करीब दो महीने तक यह समस्या बनी रह सकती है। उनका तर्क है कि बारिश और तूफान के कारण बिजली की लाइनें टूट जाती हैं, जिसके चलते कट लगते हैं और इसके बाद स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
लेकिन अब सवाल यह है कि जब वर्तमान में न तो लगातार बड़े तूफान आ रहे हैं और न ही वैसी भारी बारिश हो रही है, तो फिर बार-बार बिजली गुल होने के पीछे वास्तविक कारण क्या है? क्या हर बिजली कट के लिए मौसम को जिम्मेदार ठहराना ही विभाग का जवाब रह गया है?