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नौकायान को मिली मंजूरी मगर शेरों की दहाड़ बिना आज भी पर्यटक मायूस

SAPNA THAKUR • 20 Dec 2022 • 1 Min Read

HNN/ नाहन

11 महीने बाद शुरू हुआ नौकायान मगर बाघ से महरूम चिड़ियाघर अभी भी पर्यटकों के लिए अधूरा नजर आता है। जिला सिरमौर में श्री रेणुका जी तीर्थ स्थल न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ साहसिक पर्यटन को भी आकर्षित कर सकता है। यही नहीं रामसर साइट में वेटलैंड होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह क्षेत्र पर्यटन को लेकर अभी भी अधूरा है।

हालांकि, इस क्षेत्र की पवित्र धार्मिक झील में 11 महीनों के बाद नौकायान शुरू हो चुका है मगर चिड़िया घर आज भी कई वन्य प्राणियों से महरूम है, जबकि एक समय ऐसा था जब यहाँ के जंगल झील के साथ बने चिड़ियाघर में रह रहे शेरों की दहाड़ से गुंजा करते थे। बाघ के लिए बनाया गया बाड़ा आज भी बाघ के आने की राह तक रहा है। ऐसे में इस वेटलैंड को आकर्षित करने वाला पर्यटन आज भी पर्यटकों के बिना अधूरा है।

हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस वेटलैंड क्षेत्र में दो प्रमुख प्राकृतिक झीले है जिनमें श्री रेणुका ज़ी और भगवान परशुराम तालाब प्रमुख है। इन दोनों तालाबों में हर साल कई साइबेरियन पक्षी मेहमान नवाजी में आते है। यही नहीं इस झील में वन्य प्राणी विभाग के द्वारा कई दुर्लभ वल्चर की उपस्थित को दर्ज किया गया है। क्षेत्र में पर्यटन के विभिन्न आयामों की आपार संभावनाएं है मगर पर्यटकों के रहने खाने आदि को लेकर कोई ख़ास उचित व्यवस्था यहाँ नहीं है।

हिमाचल प्रदेश टूरिज्म का होटल यहाँ पर बना हुआ है साथ ही रेणुका विकास बोर्ड की आवासीय सुविधा भी है मगर इन सभी आवासीय स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर को आकर्षित करने का कोई विशेष आकर्षण नहीं है। वन्य प्राणी विभाग के द्वारा मौजूद कुछ चुनिंदा वन्य प्राणियों के लिए बेहतर इंतज़ाम किये गए है। मगर इस क्षेत्र में एक आकर्षक और बड़ा बनाया जा सके उसको लेकर भारी कमी नजर आती है।

कुल मिलकर कहा जाए तो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का वादा रखने वाला श्री रेणुका जी तीर्थ स्थल आज भी सरकार की नज़रे इनायत के साथ-साथ उचित योजना को तरस रहा है।