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प्रदेश सरकार भांग की खेती को कानून वैधता देने पर कर रही विचार- सीएम सुक्खू

Ankita • 19 Apr 2023 • 1 Min Read

HNN/ शिमला

भांग की खेती का इतिहास लगभग 12 हजार वर्ष पुराना है और इसे मानव द्वारा उगाई गई सबसे पुरानी फसलों में गिना जाता है। सदियों से यह खुले में प्राकृतिक तौर पर उगती रही है। एनडीपीएस. एक्ट के तहत राज्यों को औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को साधारण अथवा विशेष आदेशों के तहत अनुमति प्रदान करने की शक्तियां निहित की गई हैं।

यह अनुमति केवल भांग के रेशे अथवा इसके बीज या बागवानी और औषधीय उपयोग के लिए ही दी जा सकती है। औद्योगिक उद्देश्य से इसका उत्पादन देश में कानूनी रूप से वैध है। प्रदेश सरकार भांग की खेती को कानून वैधता देने पर विचार कर रही है। इसके लिए विधायकों की एक पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है।

यह समिति राज्य में भांग की खेती से जुड़े प्रत्येक पहलु का विस्तृत अध्ययन करेगी। समिति के सदस्य विभिन्न क्षेत्रों में अवैध तौर पर संचालित की जा रही भांग की खेती के स्थलों का भी दौरा करेगी। एक माह में समिति सरकार को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर ही प्रदेश सरकार कोई निर्णय लेगी।

सुक्खू ने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार भांग के औषधीय उपयोग की संभावनाओं पर सावधानीपूर्वक विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भांग की पत्तियों और इसके बीजों के उपयोग से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के बाद ही इस बारे में कोई नीति अथवा कानून बनाने पर विचार करेगी।

केंद्र सरकार ने भी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछेक जिलों में भांग की खेती को वैध दर्जा दिया । उत्तराखंड में भी औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की खेती की जा रही है। सरकार इस बारे में अंतिम निर्णय लेने से पूर्व नियामक उपायों सहित सभी पहलुओं पर विस्तृत तौर पर गहन विचार करेगी और जिन राज्यों ने इसे कानूनी वैधता प्रदान की है, उसका भी अध्ययन किया जाएगा।