प्रशासन की लापरवाही या बड़े हादसे का इंतज़ार?
8 साल से ‘डेथ ट्रैप’ बने सीएमओ कार्यालय में जान हथेली पर रख रहे कर्मचारी
नाहन:
जिला सिरमौर का मुख्य चिकित्सा कार्यालय (सीएमओ) इन दिनों खुद ‘बीमार’ है और प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतज़ार में सोया नजर आ रहा है। साल 2017 में अनसेफ घोषित हो चुका यह भवन आठ साल बीत जाने के बाद भी नए निर्माण के अगले चरण तक नहीं पहुँच पाया है।
विडंबना देखिए कि जिस खंडहरनुमा इमारत को ढहाकर नया बनाया जाना था, वहां अब 10 लाख रुपये खर्च कर बिजली की फिटिंग बदली जा रही है। अनसेफ बिल्डिंग को बचाने के लिए सीएसआर फंड से ‘पैचवर्क’ का जुगाड़ किया जा रहा है, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हैरान कर देने वाली बात यह है कि करीब 80 साल पुराने इस जर्जर भवन को 28 नवंबर 2017 को ही एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने असुरक्षित घोषित कर दिया था। दो दर्जन से अधिक कमरों वाले इस कार्यालय में बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है और कर्मचारी बाल्टियां लेकर बैठने को मजबूर हैं।
आठ साल से प्रशासन इस कार्यालय को किसी वैकल्पिक स्थान पर शिफ्ट करने में भी नाकाम रहा है। हालांकि नए भवन के लिए करीब 8 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ था, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला।
इस जर्जर भवन ने अब तक आठ बरसातें झेल ली हैं और नौवीं बरसात में यह टिक पाएगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। यदि यहां कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मामले पर प्रतिक्रिया के लिए डीसी प्रियंका वर्मा से संपर्क करने की बार-बार कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
वहीं, सीएमओ सिरमौर राकेश प्रताप का कहना है कि भवन काफी पहले अनसेफ डिक्लेयर हो चुका है और शिफ्टिंग के लिए जगह की तलाश की जा रही है। उन्होंने माना कि बिजली की फिटिंग खतरनाक हो चुकी थी, जिसे 10 लाख के बजट से ठीक किया जा रहा है।