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बेटियों के सशक्तिकरण में बिलासपुर की पहल को राष्ट्रीय पहचान, स्कॉच अवार्ड सेमीफाइनल में पहुंचा मॉडल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 20 फ़रवरी 2026 at 4:25 pm

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जिला प्रशासन बिलासपुर की ‘बिलासपुर की शान बेटियां-बेटियां बनें कुशल’ पहल ने स्कॉच अवार्ड 2025 के सेमीफाइनल में स्थान बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है। यह उपलब्धि बेटियों के कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जिले के प्रयासों की बड़ी स्वीकृति मानी जा रही है।

बिलासपुर

स्कॉच अवार्ड 2025 के सेमीफाइनल में पहुंची पहल

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जिला प्रशासन बिलासपुर की अभिनव पहल ‘बिलासपुर की शान बेटियां-बेटियां बनें कुशल’ ने प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड 2025 के सेमीफाइनल में स्थान बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। यह सम्मान बेटियों के सशक्तिकरण और कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की सराहना का प्रतीक है।

कौशल प्रशिक्षण से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास

उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना से प्रेरित इस मॉडल का उद्देश्य बेटियों को कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से ब्यूटीशियन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मोटर ड्राइविंग सहित विभिन्न रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से जोड़ा गया है।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और अनेक बेटियां स्वरोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं।

लिंग अनुपात में सुधार की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम

उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2020-21 में जन्म के समय लिंग अनुपात में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन जागरूकता अभियानों और समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में जिले का जन्म के समय लिंग अनुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

फाइनल चरण में पहुंचा तो बनेगी ऐतिहासिक उपलब्धि

उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि यदि यह पहल स्कॉच अवार्ड के अंतिम चरण में पहुंचती है, तो यह जिला बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

उन्होंने इस सफलता का श्रेय पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों, विभागीय अधिकारियों तथा आमजन के सहयोग को दिया।

जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2003 में स्थापित स्कॉच अवार्ड सुशासन, सामाजिक समावेशन और जनकल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है।

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