लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

महाविद्यालय चौकीमन्यार बंद करने के फैसले पर छात्रों और अभिभावकों में गहरा रोष

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 25 फ़रवरी 2026 at 5:49 pm

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

जिला ऊना के राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार को बंद करने के प्रस्तावित निर्णय से छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने सरकार से पुनर्विचार कर ग्रामीण बेटियों की शिक्षा को सुरक्षित रखने की मांग की है।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

सरकारी निर्णय से क्षेत्र में असंतोष

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

जिला ऊना की उप तहसील जोल के अंतर्गत आने वाले राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार को बंद करने के सरकार के फैसले से छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। विशेष रूप से छात्राओं और उनके अभिभावकों ने इस निर्णय पर चिंता जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि यह कॉलेज आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा का एक सुरक्षित और सुलभ माध्यम रहा है, जिसे बंद करना क्षेत्र के शैक्षणिक भविष्य के साथ अन्याय होगा।

2016 में हुई थी स्थापना

राजकीय महाविद्यालय चौकीमन्यार की स्थापना वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह द्वारा की गई थी। उस समय क्षेत्र में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण छात्र-छात्राओं को ऊना और अम्ब जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था, जिसके लिए उन्हें लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अधिकांश परिवारों के लिए यह आर्थिक और सामाजिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। कॉलेज की अपनी भवन व्यवस्था न होने के कारण प्रारंभ में इसका संचालन स्थानीय स्कूल भवन में किया गया। हालांकि वर्षों बाद भी कॉलेज की स्वयं की इमारत नहीं बन पाई, लेकिन इसके बावजूद यहां शिक्षा का कार्य नियमित रूप से चलता रहा और क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को इसका लाभ मिला।

97 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इस महाविद्यालय में कुल 97 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया, जिनमें लगभग 10 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संख्या भले ही कम प्रतीत होती हो, लेकिन ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों को देखते हुए यह कॉलेज क्षेत्र की बेटियों के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है। यहां पढ़ने के लिए कई छात्र-छात्राएं 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर कॉलेज पहुंचते हैं।

गरीब परिवारों की बेटियों पर पड़ेगा असर

अभिभावकों का कहना है कि यदि कॉलेज बंद हुआ तो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की बेटियां उच्च शिक्षा से वंचित हो सकती हैं। वर्ष 2025-26 में 20 ऐसे छात्र-छात्राओं का निःशुल्क प्रवेश करवाया गया, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं। ऐसे परिवारों के लिए दूर स्थित कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होगा।

स्थानीय लोगों की चिंता

स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि छात्राओं को ऊना या अम्ब के कॉलेजों में जाना पड़ा तो उन्हें प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी होगी, जिससे सुरक्षा और परिवहन की समस्याएं बढ़ेंगी। कई अभिभावक सामाजिक कारणों से अपनी बेटियों को दूर पढ़ने भेजने में संकोच करते हैं। ऐसे में यह निर्णय सीधे तौर पर बेटियों की शिक्षा को प्रभावित करेगा।

फैसले की आलोचना

समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कॉलेज को बंद करने की बजाय इसे सशक्त और संसाधनयुक्त बनाने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि कॉलेज की अपनी इमारत बना दी जाए और आवश्यक स्टाफ व सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यहां छात्र-छात्राओं की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

छात्र-छात्राओं की प्रतिक्रिया

तमन्ना शर्मा (बीए प्रथम वर्ष) ने कहा कि यह कॉलेज उनके घर के काफी नजदीक है, जिससे वे समय पर घर पहुंच जाती हैं। उन्होंने बताया कि दूर कॉलेज होने पर परिवहन की समस्या, समय की बर्बादी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ जाती हैं। कई अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने के लिए तैयार नहीं होते।

अंकित शर्मा (बीकॉम तृतीय वर्ष) ने कहा कि कॉलेज की स्थापना इसलिए की गई थी क्योंकि इस क्षेत्र में लड़कियों की उच्च शिक्षा की दर बेहद कम थी। कॉलेज खुलने के बाद छात्राओं की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यदि कॉलेज बंद किया गया तो यह क्षेत्र के शैक्षणिक विकास के लिए बड़ा झटका होगा।

शालिनी धीमान (बीए प्रथम वर्ष) का कहना है कि कॉलेज की अपनी इमारत न होने के बावजूद यहां शिक्षा का वातावरण अच्छा है। यदि सरकार कॉलेज के लिए स्थायी भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो भविष्य में छात्राओं की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने अपील की कि कॉलेज को बंद करने के बजाय इसे मजबूत किया जाए।

पुनर्विचार की मांग

अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण बेटियों के सपनों और आत्मनिर्भरता का आधार है। यदि इसे बंद किया गया तो आने वाले समय में कई छात्राएं शिक्षा से वंचित रह सकती हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता और असंतोष का माहौल है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]