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राजगढ़ के वार्ड नंबर सात कोटली में पानी के लिए त्राहि-त्राहि

SAPNA THAKUR | 10 जून 2022 at 12:12 pm

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HNN/ राजगढ़

पीने के पानी के लिए तरस रहे राजगढ़ के वार्ड नंबर सात के बाशिंदों ने जल शक्ति विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस वार्ड के लोगों ने जेएसवी स्टाफ की कार्यशैली से तंग आकर मुख्यमंत्री व जल शक्ति मंत्री को पत्र भेजकर पानी उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई गई है। वार्ड नंबर सात के विवेक सूद, सीमा चैहान, डाॅ शशि किरण, सुलोचना, संजीव कुमार, रमेश कुमार, धर्मपाल सहित अनेक लोगों का कहना है कि नगर पंचायत का वार्ड नंबर सात ग्रामीण क्षेत्र में पड़ता है।

इन क्षेत्रों में पानी की किल्लत बीते कई वर्षों से चल रही है। बताया कि जल शक्ति विभाग द्वारा कभी कभार 15-20 मिनट के लिए इन वार्डों में जलापूर्ति की जाती है जोकि रिहायशी लोगों व किसान वर्ग के लिए नाकाफी है। बता दें कि इस वार्ड के किसानों को अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए खड्डों में ले जाना पड़ता है। यही नहीं इन वार्डों में कर्मचारियों सहित अन्य लोगों ने जमीन लेकर मकान बनाए है परंतु जल शक्ति विभाग इन वार्डों की आबादी को पेयजल उपलब्ध करवाने में विफल रहा है।

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लोगों का आरोप है कि वार्ड नंबर के लोग बीते कई वर्षों से पानी के लिए विभाग से गुहार लगा रहे हैं परंतु विभाग द्वारा इस वार्ड में जलापूर्ति करने में भेदभाव किया जा रहा है। लोग प्यासे मर रहे है। क्वाटर में रहने वाले लोगों की ऐसी हालत है कि उनको खाना पकाने के लिए मात्र हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है जहां पर पानी के लिए लाइन लगी रहती है। इन वार्डों के लोगों का कहना है कि यहा पर हफ्ते में केवल दो दिन पानी 15-20 मिनट के लिए मिलता है।

जिससे पीने का गुजारा भी नहीं हो पाता है। लोगों का यह भी आरोप है कि कुछ लोगों की टंकियां ओवरफलो होती है और कुछ लोगों को पानी पीने को भी नसीब नहीं हो रहा है। बता दें जहां एक ओर गर्मियों का प्रकोप बढ़ने लगा है पानी की किल्लत विकराल होने लगी है। शहर की पेयजल समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2015 में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा छः करोड़ की उठाऊ पेयजल योजना का शिलान्यास किया गया था।

बजट होने के बावजूद भी यह योजना बीते सात वर्षों से एफसीए की मंजूरी नहीं मिलने के कारण अधर में लटकी है और सरकार द्वारा इस योजना को क्रियाशील बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। राजगढ़ शहर के लिए वर्ष 2005 में कंडा नाला से पेयजल योजना बनाई गई थी। उस दौरान शहर की आबादी केवल अढाई हजार हुआ करती थी जो कि वर्तमान में बढ़कर करीब छः हजार हो चुकी है। इसी योजना से लोगों को पानी मिल रहा है जोकि वर्तमान आबादी के हिसाब से बहुत कम है।

यदि पैरवी खड्ड से बनने वाली उठाऊ पेयजल योजना बन जाती है तो उससे शहर की पेयजल समस्या का काफी समाधान होना संभव था। सहायक अभियंता जेएसवी बीके कौंडल ने बताया कि गर्मी के कारण पेजयल स्त्रोत सूखने लग गए है जिससे पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होने बताया कि नगर पंचायत के इस वार्ड में पेयजल समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

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