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वरूथिनी एकादशी 2025 / व्रत, उपाय और पुण्य लाभ की पूरी जानकारी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 21 अप्रैल 2025 at 5:00 am

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भगवान विष्णु को समर्पित वरूथिनी एकादशी व्रत से मिलता है समस्त पापों से छुटकारा और जीवन में सुख-शांति

साल 2025 में वरूथिनी एकादशी का पावन व्रत 24 अप्रैल, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। यह व्रत वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विशेष उपाय करने से कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और शत्रु नाश होता है।

व्रत का पुण्यफल और महत्व

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वरूथिनी एकादशी व्रत को करने से व्यक्ति को अपने जीवन में किए गए पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत संपूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो भगवान विष्णु की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

व्रत तिथि और शुभ संयोग

वरूथिनी एकादशी की तिथि इस बार बेहद शुभ संयोग लेकर आ रही है। एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अप्रैल को शाम 4:43 बजे और समाप्ति 24 अप्रैल को दोपहर 2:32 बजे तक होगी। ऐसे में व्रत 24 अप्रैल, गुरुवार को रखा जाएगा। बृहस्पतिवार भगवान विष्णु का दिन माना जाता है, जिससे यह एकादशी और भी फलदायी मानी जा रही है।

व्रत से जुड़ी विशेष साधनाएं और उपाय

धन में वृद्धि के लिए
पीले वस्त्र में 11 कौड़ियां और हल्दी की गांठ बांधकर तिजोरी में रखें। इससे आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।

सौभाग्य बढ़ाने हेतु
केले के वृक्ष की पूजा करें और जल अर्पित करें। यह उपाय जीवन में सुख, सौभाग्य और यश में वृद्धि करता है।

कर्ज से मुक्ति के लिए
रात को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाएं और “ॐ ऋण मुक्तेश्वराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे ऋण बोझ से मुक्ति मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

बुरी नजर से बचाव के लिए
एक नींबू में चार लौंग लगाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र पढ़ते हुए अपने ऊपर 7 बार घुमाएं और फिर उसे चौराहे पर रख आएं।

शत्रु बाधा निवारण हेतु
हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को चमेली का तेल अर्पित करें। यह उपाय शत्रुओं की नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।

उपसंहार

वरूथिनी एकादशी एक ऐसा दिन है जब व्यक्ति आस्था, व्रत और ध्यान के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बना सकता है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति का भी माध्यम है।

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