इन विधानसभा क्षेत्रों से इनकी जीत लगभग तय, आजाद उम्मीदवारों की खुलेगी लॉटरी
HNN / शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए स्पष्ट बहुमत के संकेत नहीं दे रहा है। जिसमें टिकट ना मिलने से नाराज आजाद उम्मीदवार किसी भी दल की सरकार बनाने में अहम साबित होंगे। प्रदेश की 68 विधानसभाओं में कांग्रेस-भाजपा को पिछाड़ रही है। मगर इनका यह आंकड़ा तब बिगड़ सकता है यदि लगभग 4 या उससे अधिक आजाद उम्मीदवार जीत हासिल कर लेते हैं। आजाद उम्मीदवारों में भाजपा से नाराज नालागढ़ के केएल ठाकुर , आनी से किशोरी लाल सागर, देहरा से होशियार सिंह, इंदौरा से मनोहर धीमान, मंडी से प्रवीण शर्मा, बंजार से हितेश्वर सिंह, चंबा सदर से इंदिरा कपूर, बिलासपुर से सुभाष शर्मा तथा बड़सर से संजीव शर्मा।
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इनमें केएल ठाकुर बिलासपुर से, सुभाष शर्मा देहरा से, होशियार सिंह बंजार से और हितेश्वर सिंह की हवा भी काफी चली हुई थी। उधर, कांग्रेस में जीआर मुसाफिर अगर सीट निकालने में कामयाब हो जाते हैं तो निश्चित तौर पर वह कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होंगे। सरकार यदि एक वोट के ऊपर अटकती है तो जीआर मुसाफिर मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के साथ कांग्रेस को सत्ता में ला सकते हैं। वही इंदु वर्मा, सुभाष मंगलेट तथा अर्की के राजेंद्र कुमार भी कांटे की टक्कर में रहे हैं। प्रदेश में यदि बात की जाए दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की, तो सबसे पहले हम बात करेंगे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह जिला की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सिराज में एक बार फिर से चेतराम ठाकुर को पटकनी देते हुए नजर आते हैं।
तो अनुसूचित जाति आरक्षित चुराह सीट पर हंसराज, यशवंत सिंह खन्ना को टक्कर देते नजर आ रहे हैं। भरमौर की अनुसूचित जनजाति सीट पर कांग्रेस के ठाकुर सिंह भरमौरी सीट निकालते नजर आते हैं। तो वही इस बार चंबा में इंदिरा कपूर का टिकट कटने के बाद नीलम नैय्यर की नैया पार लगती नजर नहीं आती है। इस सीट पर कांग्रेस के नीरज नैय्यर और आजाद उम्मीदवार इंदिरा कपूर दोनों में से कोई भी जीत हासिल करने के काफी नजदीक है। यहां पर कांग्रेस की सीट भितरघाती समीकरणों के चलते जीतती हुई नजर आ रही है। डलहौजी में कमल का फूल खिलना तय माना जा रहा है, यहां पर भाजपा के डीएस ठाकुर सीट निकालते हुए नजर आते हैं।
बात यदि भटियात सीट की करे, तो यहां भाजपा के विक्रम जरियाल को कांग्रेस के कुलदीप पठानिया पटकनी देते नजर आ रहे हैं। नूरपुर में भाजपा के रणवीर सिंह उर्फ निक्का और कांग्रेस के अजय महाजन कांटे की टक्कर में रहे हैं। मगर जो विधानसभा क्षेत्र से जनता का रुझान मिला है उसमें अजय महाजन की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। इंदौरा में मनोहर धीमान भाजपा प्रत्याशी के समीकरण बिगाड़ रहे हैं, यहां मलेंदर राजन कांग्रेस की सीट निकाल सकते हैं। फतेहपुर सीट क्लियर कट भवानी सिंह पठानिया को जाती नजर आ रही है। जवाली में भी प्रोफेसर चंद्र कुमार काफी मजबूत नजर आ रहे है। उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर जसवान प्रागपुर से इस बार फिर से कमल खिला सकते हैं।
सुलह सीट भी विपिन सिंह परमार के खाते में जाती हुई नजर आती है। नगरोटा के लोगों ने एक बार फिर से अपने प्रिय स्वर्गीय नेता के बेटे रघुवीर सिंह बाली पर विश्वास जाहिर किया है। इस सीट पर कांग्रेस जीत हासिल करती नजर आती है। कांगड़ा की सीट पर सुरेंद्र सिंह काकू, कांग्रेस के शाहपुर केवल सिंह पठानिया, कांग्रेस धर्मशाला सुधीर शर्मा, कांग्रेस पालमपुर आशीष बूटेल कांग्रेस, तो बैजनाथ की सीट मुल्क राज प्रेमी भाजपा के खाते में जाती नजर आती है। अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में इस बार रामलाल मारकंडे को हार का सामना करना पड़ सकता है। यहां पर रवि ठाकुर को बहुमत मिलता नजर आ रहा है।
इस विधानसभा क्षेत्र में लोगों की कोरोना काल में क्षेत्र के लोगों की समस्याओं की अनदेखी किया जाना बड़ा मुद्दा भी बना हुआ था। मनाली सीट पर भुवनेश्वर गौड़ कांग्रेस के जीत हासिल करते नजर आते हैं, तो बंजार में इस बार भाजपा के सुरेंद्र शौरी जीत हासिल कर सकते हैं। अनुसूचित जाति संरक्षित आनी सीट कांग्रेस के बंसीलाल कौशल का रुझान देती नजर आती है। करसोग सीट पर भाजपा और कांग्रेस के महेश राज तथा दीप राज कपूर में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। जबकि सुंदरनगर में इस बार सोहन लाल ठाकुर भी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। नाचन सीट पर कांग्रेस के नरेश कुमार तो द्रंग सीट पर भाजपा के पूरन चंद को कांग्रेस के कौल सिंह ठाकुर पटकनी देते नजर आ रहे हैं।
जोगिंदर नगर सीट पर भाजपा के प्रकाश राणा और कांग्रेस के सुरेंद्र पाल ठाकुर में कांटे की टक्कर है। इस सीट पर कुछ भी कह पाना मुश्किल माना जा रहा है। धर्मपुर सीट ठाकुर महेंद्र सिंह का गढ़ माना जाता था, मगर इस बार उनके बेटे रजत ठाकुर के मैदान में उतरने से यह सीट चाहे भाजपा का प्रत्याशी हो या कांग्रेस का, बहुत कम मार्जिन के साथ दोनों में से कोई एक जीत हासिल करेगा, मगर जो हवा की बात की जाए तो वह भाजपा प्रत्याशी रजत ठाकुर के पक्ष में जाती नजर नहीं आती है। मंडी सीट में चंपा ठाकुर और भाजपा सरकार में शामिल रहे अनिल शर्मा दोनों कांटे की टक्कर में है। यहां अनिल शर्मा जीत के काफी नजदीक माने जाते हैं।
बल्ह सीट पर इस बार कांग्रेस के प्रकाश चौधरी जीत के काफी नजदीक हैं इस सीट पर भाजपा के इंदर सिंह गांधी मैदान में उतरे हुए थे। सरकाघाट बीजेपी और कांग्रेस यानी दिलीप ठाकुर और पवन कुमार में कांटे की टक्कर है यहां कुछ भी कहा नहीं जा सकता। अब अनुसूचित जाति आरक्षित भोरंज सीट सुरेश कुमार कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हैं, जिनकी जीत भी लगभग तय मानी जा रही है। यहाँ भाजपा की कमलेश का टिकट कटने से डॉ अनिल धीमान काफी कमजोर स्थिति पर पहुंचे हैं। वही सुजानपुर में राजेंद्र राणा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। कांग्रेस के पुष्पेंद्र वर्मा जीत के नजदीक माने जा रहे हैं, तो नादौन सीट पर कांग्रेस के सुखविंदर सिंह सुक्खू भारी मतों से जीतते नजर आते हैं।
चिंतपूर्णी सीट भी कांग्रेस के खाते में जाती नजर आती है। गगरेट सीट भाजपा के खाते में यानी राजेश ठाकुर की जीत को सुनिश्चित करती है। ऊना में भाजपा के सतपाल सिंह सत्ती इस बार जीत की ओर अग्रसर है। कुटलैहड सीट पर भाजपा के वीरेंद्र कंवर तो झंडुता में जेआर कटवाल भाजपा के जीत के काफी नजदीक हैं। घुमारवीं सीट जहां राजेश धर्माणी पिछली बार हारे थे मगर इस बार वह राजेंद्र गर्ग को पटखनी देते हुए जीतते हुए नजर आ रहे हैं। बिलासपुर सीट पर बंबर ठाकुर भारी बहुमतों से भी जीत सकते हैं। नैना देवी में राम लाल ठाकुर पर एक बार फिर से माता प्रसन्न होती नजर आ रही है यह सीट भी कांग्रेस के खाते में जाती नजर आती है।
अर्की सीट इस बार कांग्रेस संजय अवस्थी की जीत के नजदीक हैं, जबकि गोविंदराम शर्मा भी कांटे की टक्कर में है। नालागढ़ सीट पर जहां शुरू में लखविंदर राणा की हवा बनी थी, मगर बाद में अचानक समीकरण बदले और जनता में हवा हरदीप सिंह बाबा की ज्यादा चली। दून सीट पर कांग्रेस के रामकुमार चौधरी की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है तो वही सोलन में एक बार फिर से कांग्रेस के धनीराम शांडिल की जीत पक्की मानी जा रही है। यहां चुनाव में सबसे बड़ी प्रबंधन की खामी रही। भाजपा के प्रत्याशी के द्वारा नाराज पुराने भाजपाई चेहरों को कहीं पर भी मनाने की कोशिश नहीं की गई। अब यदि बात की जाए विधानसभा कसौली की, तो इस बार यहां पर विनोद सुल्तानपुरी कांग्रेस को जीत हासिल कराते नजर आते हैं।
पच्छाद सीट आजाद उम्मीदवार गंगूराम मुसाफिर की जीत दर्शाती है, मगर अंदर खाते की यदि बात की जाए जिसमें देवभूमि राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी के द्वारा यदि 10000 से ऊपर वोट खींच लिए जाते हैं तो यह सीट दयाल प्यारी का भाग्य भी जगा सकती है। नाहन में वोटिंग परसेंटेज 2017 की तुलना में कम रहा है, वोटर बड़ा साइलेंट था, अजय सोलंकी और राजीव बिंदल में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। दोनों में से किसी की भी हार जीत 500-700 वोटों से ही मानी जाएगी। उधर, पांवटा साहिब में सुखराम चौधरी ने बहुत डैमेज कंट्रोल करते हुए अपनी जीत को पक्का कर लिया है।
तो श्री रेणुका जी और शिलाई दोनों सीटों पर कांग्रेस का हल्ला मचा हुआ है जबकि नारायण सिंह अपनी पहली पारी में जीत के काफी नजदीक हैं। चौपाल-ठियोग-कसुंपटी यह तीनों सीटें कांग्रेस के खाते में, तो शिमला संजय सूद जोकि भाजपा के प्रत्याशी हैं, जीत हासिल कर सकते हैं। शिमला ग्रामीण- जुब्बल-कोटखाई-रोहड़ू तथा किन्नौर यह सभी सीटें इस बार कांग्रेस के खाते में है। कुल मिलाकर कहा जाए तो दोनों प्रमुख राजनीतिक दल स्पष्ट बहुमत में नहीं है। बावजूद इसके किए गए विश्लेषण में कांग्रेस का पलड़ा भारी है। ऐसे में आजाद उम्मीदवार किसी भी दल की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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