शिमला में प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों से 26 अप्रैल की हाजिरी रिपोर्ट तलब की
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय
राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल प्राथमिक शिक्षकों पर सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों से 26 अप्रैल 2025 की हाजिरी रिपोर्ट तलब की है। जिन शिक्षकों ने अवकाश लिए बिना स्कूलों से गैरहाजिर रहकर प्रदर्शन में भाग लिया, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उनका एक दिन का वेतन भी काटा जाएगा।
कारण बताओ नोटिस और अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तैयारी
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को पत्र भेजकर दो दिन के भीतर अनुपस्थित शिक्षकों की सूची मांगी है। रिकॉर्ड तैयार होने के बाद संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। संतोषजनक जवाब न देने पर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसके अलावा, गैर-शिक्षण कार्यों से इनकार करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की भी योजना है।
सोशल मीडिया से जुटाए जा रहे प्रमाण
सरकार के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करने वाले शिक्षकों की पहचान के लिए सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो खंगाले जा रहे हैं। अब तक चार शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है और अन्य की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सरकार बेहद गंभीर है और कोई ढील नहीं बरती जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने पुनर्गठन के फैसले पर दी सफाई
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने साफ कर दिया कि शिक्षा निदेशालय के पुनर्गठन का निर्णय वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में शिक्षा निदेशालयों का ढांचा इसी प्रकार का है और हिमाचल प्रदेश में भी उसी तर्ज पर इसे तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 से पहले भी प्रदेश में यही व्यवस्था थी। प्राथमिक शिक्षक संघ से संवाद के जरिये मुद्दे सुलझाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से सरकार की नीतियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है। सरकार के दरवाजे हमेशा वार्ता के लिए खुले हैं।