सीमावर्ती क्षेत्रों में औषधीय खेती को बढ़ावा, सेना–राज्य सरकार–बैद्यनाथ के बीच एमओयू
राज्य के दूरदराज और सीमावर्ती गांवों में औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती को प्रोत्साहित कर किसानों को स्थायी आजीविका से जोड़ने की दिशा में अहम पहल की गई है।
शिमला
दूरदराज क्षेत्रों को मिलेगा स्थायी आजीविका का आधार
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में भारतीय सेना, हिमाचल प्रदेश सरकार और श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद झांसी के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना है।
किसानों को प्रशिक्षण और तय कीमत पर खरीदी की गारंटी
समझौता ज्ञापन के तहत आयुष विभाग किसानों को औषधीय पौधों की खेती से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करेगा। श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद द्वारा किसानों से उनकी फसल तय कीमत पर खरीदी जाएगी तथा गुणवत्तायुक्त बीज और पौध सामग्री भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
सेना निभाएगी प्रेरक और समन्वयक की भूमिका
भारतीय सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने और इस पहल में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करेगी बल्कि पारंपरिक आयुर्वेद प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने जताया भरोसा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी और दूरदराज क्षेत्रों में टिकाऊ विकास को गति मिलेगी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इनके बीच हुआ समझौता
समझौते पर भारतीय सेना की ओर से कर्नल टी.एस.के. सिंह, हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से आयुष विभाग के निदेशक रोहित जमवाल और श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद झांसी की ओर से शैलेश शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, सचिव आयुष प्रियंका बासु इंगटी सहित सेना और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।