ऊना/वीरेंद्र बन्याल
प्रवासी श्रमिकों की पहचान व सत्यापन अनिवार्य, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
जिले में छह महीने तक लागू रहेगी निषेधाज्ञा
ऊना के उपायुक्त एवं जिला दंडाधिकारी जतिन लाल ने जिले की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 के अंतर्गत एक निषेधाज्ञा जारी की है। यह आदेश अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगा और मुख्य रूप से जिले में बाहरी प्रवासियों के सत्यापन व असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण को ध्यान में रखकर जारी किया गया है।
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बिना पहचान के आने वाले व्यक्तियों से बढ़ता है खतरा
डीसी जतिन लाल ने बताया कि जिले में कई बार ऐसे लोग नौकरी के बहाने आते हैं जो बिना किसी वैध पहचान या पुलिस सत्यापन के छोटे-मोटे कार्यों या ठेका श्रमिक के रूप में काम करते हैं। इनकी पृष्ठभूमि की जानकारी न होने से अपराध की रोकथाम में बाधा आती है और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सभी नियोक्ताओं व व्यापारियों को सत्यापन अनिवार्य
जारी आदेशों के तहत कोई भी नियोक्ता, ठेकेदार या व्यापारी किसी प्रवासी व्यक्ति को बिना सत्यापन के किसी भी कार्य में नहीं लगा सकेगा। ऐसे सभी श्रमिकों का नाम, फोटो व जानकारी संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ) के पास पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। जो व्यक्ति स्वयं रोजगार कर रहे हैं, उन्हें भी अपने इरादों की सूचना एसएचओ को देनी होगी।
धार्मिक स्थलों पर आश्रय लेने वालों का भी होगा रिकॉर्ड
जिले में स्थित सभी धार्मिक स्थलों और संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां आश्रय लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड रखें। बिना पुलिस पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति इन संस्थानों में नहीं ठहर सकेगा। सभी उपमंडलीय पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस आदेश के पालन को सुनिश्चित करें और समय-समय पर समीक्षा करें।
आदेश का उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर प्रवासी श्रमिकों या नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश जिले में शांति, सुरक्षा और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
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