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सुक्खू सरकार के इन्वेस्टमेंट ब्यूरो फार्मूले पर सवालिया निशान

Ankita • 3 Apr 2023 • 1 Min Read

धारा 118 के बगैर नहीं बन पाएगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट, इन्वेस्टर्स का लैंड बैंक पर भरोसा नहीं

HNN/ नाहन

हिमाचल प्रदेश के रेवेन्यू विभाग में जहां दर्जनों इन्वेस्टर्स के टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म एक्ट धारा 118 के दर्जनों मामले लटके पड़े हैं। वहीं नया इन्वेस्टर्स इन्वेस्टमेंट ब्यूरो सिस्टम सवालिया निशान लगा रहा है। नाम ना छापने की शर्त पर कई इन्वेस्टर्स का कहना है कि उपायुक्त कार्यालय से 118 की परमिशन के मामले समय पर भेज दिए जाते हैं, मगर शिमला पहुंचते ही इन परमीशनों पर लेटलतीफी के आरोप लग जाते हैं।

इन्वेस्टर्स का यह तक कहना है कि जब तक बड़े साहब तक पैकेट नहीं पहुंच जाता है तब तक परमिशन की फाइल ऑब्जेक्शन पर ऑब्जेक्शन अटकी रहती है। ऐसे में इन्वेस्टर्स सरकार के इन्वेस्टमेंट ब्यूरो ड्राफ्ट को लेकर भी अब नजरें फेरने लग पड़ा है। इन्वेस्टर्स का कहना है कि सरकार भी तभी तो सारी परमिशन अपनी जिम्मेवारी से देगी जब उसकी अपनी जमीन की रजिस्ट्री होगी।

इन्वेस्टर्स का कहना यह भी है कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में 118 को भी रखा जाता है। उनका यह भी कहना है कि जिस बैंक से लोन लिया जाएगा वह जमीन की कीमत और जमीन की परमिशन भी देनी पड़ती है। हालांकि सरकार के इन्वेस्टर्स ब्यूरो सिस्टम में धारा 118 की अनुमति भी शामिल की गई है। मगर इसको लेकर भी इन्वेस्टर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

इन्वेस्टर्स का मानना है कि सरकार जिस एक्टिव लैंड बैंक की बात कर रही है वह क्या इन्वेस्टर्स की इच्छा अनुरूप होगा या नहीं इस पर भी संशय है। असल में यह संशय इसलिए खड़ा हो रहा है कि जो प्रमुख बॉर्डर एरिया के इंडस्ट्रियल एरिया है, वहां कहीं भी लैंड बैंक नहीं है। ऐसे में इन्वेस्टर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के अनुसार के साथ-साथ ट्रक यूनियन के दबाव के चलते अपर एरिया में इन्वेस्टमेंट को घाटे का सौदा बता रहे हैं।

इन्वेस्टर्स का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में बहुत से ऐसे उद्योग हैं जो बंद हो चुके हैं, वहां पर इन्वेस्टमेंट किया जाना फायदेमंद साबित हो सकता है। मगर यहां सबसे बड़ी समस्या उन्हें सरकार के द्वारा दी जाने वाली 118 की परमिशन है। इन्वेस्टर्स कुछ पुराने उद्योगपतियों का कहना है कि जब तक सरकार सचिव स्तर पर स्टाफ में परिवर्तन नहीं करती तब तक 118 उनके गले का फांस बनी रहेगी।

उद्योगपतियों का यहां तक कहना है कि 118 धारा से उन्हें कोई नुकसान नहीं है और ना ही हम इसका विरोध करते हैं। बल्कि 118 की परमिशन में जिस तरीके से इन्वेस्टर को प्रताड़ित किया जाता है, चक्कर पर चक्कर कटवाए जाते हैं वह सीधे तौर पर भ्रष्टाचारी चलन का इशारा करती है।

उद्योग इन्वेस्टर्स का कहना है की सरकार पहले लंबित पड़ी 118 की परमिशन को टाइम बाउंड करें। यही नहीं जो 118 की परमिशन में ऑब्जेक्शन लगाए जाते हैं उनकी क्लीयरेंस इन्वेस्टमेंट ब्यूरो के माध्यम से करवाई जाए तो निश्चित तौर पर प्रदेश में इन्वेस्टमेंट करना फायदे का सौदा होगा।