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हिमाचल सरकार ने भर्ती व पदोन्नति नियमों पर जारी किया स्पष्टीकरण, ट्रेनी शब्द हटाने के निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 17 अक्तूबर 2025 at 1:55 pm

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों में भर्ती और पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों में किए जा रहे संशोधनों को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि “ट्रेनी” और “जॉब ट्रेनी” जैसी नियुक्तियां केवल विशेष योजनाओं के तहत की जाती हैं, इसलिए इन शब्दों को किसी भी विभाग के आरएंडपी नियमों में शामिल नहीं किया जाएगा।

शिमला।

सभी प्रशासनिक सचिवों को दिए गए निर्देश
कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, संभागीय आयुक्तों, उपायुक्तों, विभागाध्यक्षों, निगमों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों के सचिवों व कुलसचिवों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस दिशा-निर्देश का पालन सुनिश्चित करें।

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आरएंडपी नियमों में हो रहे बदलावों पर स्पष्टता
पत्र के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा की शर्तें अधिनियम, 2024 लागू होने के बाद सरकार ने 5 जुलाई 2025 को विभिन्न श्रेणियों के आरएंडपी नियमों में संशोधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा, 14 मई 2025 और 19 जुलाई 2025 को सरकार ने दो अलग-अलग योजनाओं के तहत ट्रेनी और जॉब ट्रेनी के रूप में नियुक्तियों से संबंधित प्रावधान भी अधिसूचित किए थे।

विभागों को गलत शब्दावली पर चेतावनी
कार्मिक विभाग ने पाया कि कुछ प्रशासनिक विभाग अपने आरएंडपी नियमों में अनुबंध शब्द के स्थान पर ट्रेनी और जॉब ट्रेनी शब्दों का उपयोग कर रहे हैं, जो विभागीय दिशा-निर्देशों के विपरीत है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शब्दों को नियमों में जोड़ना अनुचित है, क्योंकि ये केवल विशेष योजनाओं के तहत नियोजित व्यक्तियों के लिए ही मान्य हैं।

भविष्य में नियमों में एकरूपता और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने कहा है कि भविष्य में जब भी विभाग आरएंडपी नियमों में संशोधन या नए नियम बनाएंगे, तो उन्हें 5 जुलाई 2025 को जारी निर्देशों के अनुरूप ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कार्मिक विभाग के उप सचिव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

नई सेवा प्रणाली में प्रशिक्षण आधारित नियुक्तियां
नए सेवा अधिनियम के बाद राज्य सरकार ने अनुबंध आधारित नियुक्तियों की जगह प्रशिक्षण आधारित प्रणाली लागू की है, ताकि नव-नियुक्त कर्मियों को सेवा की शुरुआत में ही व्यावहारिक अनुभव और प्रशिक्षण मिल सके।

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