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12 साल बाद श्री रेणुका जी में गूंजेगी ‘जंगल के राजा’ की दहाड़, नागपुर से पहुंचा रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा

Shailesh Saini • 38 Mins Ago • 1 Min Read

1.68 करोड़ के भव्य बाड़े में रहेगा पांच वर्षीय नर और ढाई से तीन साल की मादा बाघिन का जोड़ा, 41 घंटे के सफर में वन्यजीव टीम ने पल-पल रखी निगरानी

हिमाचल नाऊ न्यूज श्री रेणुका जी

सिरमौर की धरती पर अब एक बार फिर जंगल के राजा की दहाड़ सुनाई देगी। करीब 10 से 12 वर्षों से जिस पल का इंतजार श्री रेणुका जी चिड़ियाघर और वन्यजीव प्रेमियों को था, वह इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा श्री रेणुका जी चिड़ियाघर पहुंच गया है। जोड़े में पांच वर्षीय नर बाघ और करीब ढाई से तीन वर्ष की मादा बाघिन शामिल है।

इस बड़ी उपलब्धि के पीछे हिमाचल प्रदेश वन्यजीव विभाग की लंबी कागजी और प्रशासनिक कवायद रही है। वन्यजीव विभाग की अरण्यपाल प्रीति भंडारी, वन्यजीव डीएफओ डॉ. शाहनवाज और उनकी टीम के लगातार प्रयासों के बाद यह संभव हो पाया है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्धारित मानकों और औपचारिकताओं को पूरा करने के साथ बाघों के लिए अत्याधुनिक बाड़े का निर्माण भी किया गया।

नागपुर से रेणुका जी तक 41 घंटे का सफर, टीम ने नहीं छोड़ी पलभर की निगरानी

रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े को नागपुर के गोरेवाड़ा से सड़क मार्ग के जरिए श्री रेणुका जी लाया गया। करीब 41 घंटे के इस लंबे सफर के दौरान वन्यजीव विभाग की टीम ने बाघों की सेहत और सुविधा का पूरा ध्यान रखा। डीएफओ डॉ. शाहनवाज स्वयं टीम के साथ नागपुर गए और वहां से बाघों को लेकर लौटे।

बाघों की सुरक्षित यात्रा के लिए वन्यजीव विभाग के पशु चिकित्सक डॉ. कार्तिक, पशु हैंडलर और फील्ड स्टाफ सहित करीब आठ सदस्यीय टीम साथ रही। टीम ने पूरे रास्ते बाघों को एस्कॉर्ट किया। हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर विश्राम, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था की गई।

गर्म मौसम को देखते हुए जरूरत के अनुसार बाघों को पानी से ठंडक भी दी गई और सफर के दौरान उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी गई।

12 साल का इंतजार, कई स्तरों पर चली लंबी जद्दोजहद

श्री रेणुका जी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर लाने की कवायद पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से चल रही थी। हालांकि टाइगर लाना जितना आसान सुनाई देता है, इसके लिए उतनी ही लंबी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की स्वीकृतियों और निर्धारित मानकों के साथ महाराष्ट्र तथा केंद्र सरकार से जुड़ी विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ा।वन्यजीव विभाग ने पिछले एक-दो वर्षों में इस प्रक्रिया को विशेष रूप से आगे बढ़ाया। बाघों के लिए तैयार किए गए बाड़े को भी केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

1.68 करोड़ में तैयार हुआ ‘राजा-रानी’ का महल

श्री रेणुका जी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े के लिए तैयार किए गए बाड़े पर करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत आई है। बाघों की जरूरतों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह बाड़ा अब चिड़ियाघर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगा।

बाघों के लिए नियमित रूप से मांसाहारी आहार की व्यवस्था रहेगी। विभाग की ओर से उनके खान-पान और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाएगी। पशु चिकित्सक की देखरेख में दोनों बाघों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाएगी।

वन्यजीव पर्यटन को मिलेगा नया आकर्षण

रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े के श्री रेणुका जी पहुंचने से सिरमौर के वन्यजीव पर्यटन को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है। श्री रेणुका जी क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक और जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रेणुका झील और इसके आसपास का क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

अब टाइगर के जोड़े के आने से वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए यहां एक नया आकर्षण जुड़ गया है। इससे श्री रेणुका जी की पर्यटन पहचान को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।

वन्यजीव विभाग की टीम में उत्साह

नागपुर से बाघों को सुरक्षित श्री रेणुका जी पहुंचाने वाली टीम के लिए यह महज एक स्थानांतरण अभियान नहीं, बल्कि वर्षों के प्रयासों की सफलता है। करीब 41 घंटे के लंबे सफर की थकान के बावजूद टीम में इस उपलब्धि को लेकर खासा उत्साह है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस योजना पर एक दशक से अधिक समय से काम चल रहा था, वह अब धरातल पर उतर चुकी है।

उधर वन्यजीव डीएफओ डॉ. शाहनवाज ने रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े के श्री रेणुका जी पहुंचने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों बाघ सुरक्षित रूप से चिड़ियाघर पहुंच गए हैं और उनकी देखरेख की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि बाघों के आने से श्री रेणुका जी चिड़ियाघर की रौनक बढ़ेगी और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह नया आकर्षण बनेगा।