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2027 का चुनाव: सिरमौर बनेगा हिमाचल की सियासत की राजनीतिक प्रयोगशाला!

Shailesh Saini • 38 Mins Ago • 1 Min Read

कांग्रेस, भाजपा और लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष सिरमौर से; राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष का भी नाहन से गहरा जुड़ाव, पांच सीटों पर मुकाबला होगा दिलचस्प

हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन।

हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात अभी से बिछने लगी है और इस बार जिला सिरमौर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कांग्रेस, भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों का सीधा संबंध सिरमौर से है।

वहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर का भी नाहन से पारिवारिक और शैक्षणिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में पांच विधानसभा सीटों वाला सिरमौर आगामी चुनाव में प्रदेश की राजनीति की राजनीतिक प्रयोगशाला बनता नजर आ रहा है।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल नाहन विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और नाहन से दो बार विधायक रह चुके हैं।

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। अब लोक जनशक्ति पार्टी ने भी नाहन के नितिन चौहान उर्फ टिंकू को हिमाचल प्रदेश की कमान सौंपकर सिरमौर के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

तीनों दलों के प्रदेश अध्यक्षों के गृह जिले से होने का सीधा अर्थ यह है कि 2027 में सिरमौर की पांचों विधानसभा सीटें केवल स्थानीय चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इन सीटों के नतीजे प्रदेश नेतृत्व की संगठनात्मक पकड़ और चुनावी रणनीति का भी आकलन करेंगे।प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के कारण भाजपा संगठन के सामने सरकार के खिलाफ माहौल को चुनावी समर्थन में बदलने की चुनौती है।

डॉ. राजीव बिंदल के लिए यह परीक्षा इसलिए भी अहम होगी क्योंकि उन्हें अपने गृह जिले सिरमौर के साथ-साथ उस सोलन जिले में भी संगठन को मजबूती देनी होगी, जहां से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था।दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के सामने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल कायम रखते हुए सिरमौर में पार्टी की पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी।

स्थानीय मुद्दे, सरकार का प्रदर्शन और संगठन की सक्रियता 2027 में कांग्रेस की स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।इस बीच नितिन चौहान की लोजपा में एंट्री ने मुकाबले में नया कोण जोड़ दिया है। नितिन चौहान ने अपनी शुरुआती राजनीतिक सक्रियता में युवाओं, रोजगार और एक नए राजनीतिक विकल्प की बात को प्रमुखता दी है।

यदि लोजपा आने वाले समय में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में सफल रहती है तो उसका असर पारंपरिक कांग्रेस-भाजपा वोट समीकरण पर पड़ना स्वाभाविक है।वहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रूमित सिंह ठाकुर का नाहन से पारिवारिक जुड़ाव और शिक्षा के कारण सिरमौर से संबंध भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

ऐसे में सिरमौर से जुड़े चार राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी 2027 के चुनावी परिदृश्य को और रोचक बना रही है।नाहन, श्रीरेणुकाजी, पच्छाद, पांवटा साहिब और शिलाई—सिरमौर की पांचों विधानसभा सीटों पर इस बार होने वाला मुकाबला सिर्फ जीत-हार का आंकड़ा नहीं होगा।

इन नतीजों में कांग्रेस, भाजपा और लोजपा के प्रदेश नेतृत्व की प्रतिष्ठा, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक रणनीति की झलक भी दिखाई देगी।यही वजह है कि 2027 की चुनावी जंग भले ही अभी दूर हो, लेकिन सिरमौर में सियासी प्रयोग शुरू हो चुके हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश की सत्ता की राह में सिरमौर किस राजनीतिक दल के लिए मजबूत आधार बनता है और किसके लिए सबसे कठिन परीक्षा।

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