Accident / चंबी में अज्ञात वाहन की टक्कर से साहित्यकार रमेश मस्ताना का निधन
Accident / कांगड़ा जिले के चंबी में अज्ञात वाहन की टक्कर से घायल साहित्यकार रमेश चंद्र मस्ताना की उपचार के दौरान मौत हो गई। वह पांच नवंबर की रात बुलेट बाइक पर घर लौट रहे थे। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने हिट एंड रन मामले की जांच शुरू कर वाहन की पहचान के प्रयास तेज कर दिए हैं।
कांगड़ा/शाहपुर/चंबी
जानकारी के अनुसार, रमेश मस्ताना पांच नवंबर की रात अपनी बुलेट बाइक पर घर लौट रहे थे। शाहपुर क्षेत्र में चंबी के लदबाड़ा चौक के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए। उन्हें तत्काल शाहपुर के नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
हादसे के बाद अज्ञात वाहन का चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस अब टक्कर मारने वाले वाहन और उसके चालक की पहचान करने में जुटी है। दुर्घटना के कारणों सहित इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में बनाई पहचान
रमेश चंद्र मस्ताना धर्मशाला के ऐतिहासिक डिग्री कॉलेज के पहले स्वर्ण पदक विजेता बताए जाते हैं। उन्होंने कॉलेज से हिंदी विषय में स्नातक की पढ़ाई की थी और इसके बाद एमए हिंदी में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। इन शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ उन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी। उनके निधन से कांगड़ा के साहित्यिक और शैक्षणिक जगत में शोक का माहौल है।
रमेश मस्ताना शाहपुर क्षेत्र के नेरटी गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म लच्छमन दास और फूलां देवी के घर हुआ था। उनके दादा ज्ञानचंद लाहौर के एक मदरसे में उर्दू के शिक्षक रहे थे, जबकि उनके पिता भी शिक्षण क्षेत्र से जुड़े थे। उनके दोनों बेटे भी शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इस तरह उनका परिवार कई पीढ़ियों से शिक्षा से जुड़ा रहा है।