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मानव शरीर की उम्र पलटने की दिशा में बड़ा कदम, पहली बार एंटी-एजिंग जीन थेरेपी को मानव परीक्षण की मंजूरी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 3 Hours Ago • 1 Min Read

मानव शरीर की कोशिकाओं को युवा अवस्था में लौटाने वाली एंटी-एजिंग जीन थेरेपी को पहली बार मानव परीक्षण की मंजूरी मिली है। एफडीए की स्वीकृति के बाद सेलुलर रीप्रोग्रामिंग तकनीक पर आधारित ऐतिहासिक क्लिनिकल ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। वैज्ञानिक समुदाय इसे दीर्घायु विज्ञान और उम्र संबंधी बीमारियों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।

दुनिया में पहली बार मानव शरीर की कोशिकाओं को “युवा अवस्था” में लौटाने वाली तकनीक को मानव परीक्षण की मंजूरी मिल गई है। जैव प्रौद्योगिकी कंपनी लाइफ बायोसाइंसेज ने दावा किया है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने उसकी सेलुलर रीप्रोग्रामिंग आधारित जीन थेरेपी के पहले मानव परीक्षण को मंजूरी दे दी है।कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह मंजूरी कई वर्षों के शोध, विष विज्ञान परीक्षणों और सुरक्षा संबंधी विस्तृत आंकड़ों की समीक्षा के बाद मिली है। एफडीए के साथ हुई बैठकों में कंपनी ने चूहों, गैर-मानव प्राइमेट्स और अन्य प्रीक्लिनिकल अध्ययनों से जुड़े सुरक्षा डेटा प्रस्तुत किए, जिसके बाद नियामक एजेंसी ने मानव परीक्षण की अनुमति प्रदान की।

विशेषज्ञों के मुताबिक सेलुलर रीप्रोग्रामिंग आधुनिक जैव विज्ञान के सबसे महत्वाकांक्षी क्षेत्रों में से एक है। इस तकनीक का उद्देश्य उम्र बढ़ने के साथ क्षतिग्रस्त या कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को फिर से अधिक युवा और कार्यक्षम अवस्था में लाना है। यदि यह तकनीक सफल रहती है तो भविष्य में उम्र संबंधी कई गंभीर बीमारियों के उपचार का नया रास्ता खुल सकता है।कंपनी का कहना है कि एफडीए के साथ पूरी प्रक्रिया सहयोगात्मक और सकारात्मक रही। शुरुआती आशंकाओं के विपरीत एजेंसी ने किसी असाधारण बाधा के बजाय वैज्ञानिक आंकड़ों और सुरक्षा प्रमाणों के आधार पर निर्णय लिया।

लाइफ बायोसाइंसेज वर्तमान में आंखों से जुड़ी बीमारियों के अलावा लीवर रीप्रोग्रामिंग पर भी काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक लीवर संबंधी अध्ययनों से भी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं और आने वाले महीनों में नए शोध संकेतकों की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।वैज्ञानिक समुदाय इस मंजूरी को दीर्घायु विज्ञान और एंटी-एजिंग चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव मान रहा है। यदि मानव परीक्षण सफल रहते हैं तो यह चिकित्सा विज्ञान में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने और नियंत्रित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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