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बाल विकास परियोजना पर छाया स्टाफ का संकट, 10 में से 6 पर्यवेक्षक पद खाली

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

बाल विकास परियोजना / राजगढ़ बाल विकास परियोजना कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। परियोजना में पर्यवेक्षकों सहित कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी, पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं।कार्यालय में सीडीपीओ व एक कनिष्ठ सहायक के भरोसे चल रहा पूरा काम।

राजगढ़

विभागीय आंकड़ों के अनुसार परियोजना में पर्यवेक्षकों के 10 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल चार पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि छह पद खाली हैं। चूरवाधार, धमांधर, हाब्बन, राजगढ़-दो, सनोरा और शरगांव पर्यवेक्षक वृत्त बिना पर्यवेक्षक के चल रहे हैं। ऐसे में चार पर्यवेक्षकों पर सभी 10 वृत्तों की जिम्मेदारी आ गई है, जिससे आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण प्रभावित हो रहा है।

कार्यालय की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। सांख्यिकीय सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक और चालक के पद लंबे समय से रिक्त हैं। वर्तमान में पूरे कार्यालय का काम केवल बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और एक कनिष्ठ सहायक के भरोसे चल रहा है। सीमित स्टाफ के कारण अभिलेखों का रखरखाव, विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने और प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी मौजूदा कर्मचारियों पर है। हालात ऐसे हैं कि सीडीपीओ को प्रशासनिक दायित्वों के साथ लिपिकीय कार्य भी स्वयं संभालने पड़ रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय निरीक्षण और फील्ड भ्रमण के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।

हालांकि परियोजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेवाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के 190 स्वीकृत पदों में से 188 तथा सहायिकाओं के 190 पदों में से 187 पद भरे हुए हैं। केवल दो कार्यकर्ता और तीन सहायिकाओं के पद रिक्त हैं।

बाल विकास परियोजना अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि परियोजना के सभी रिक्त पदों का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। विभाग से शीघ्र नियुक्तियां होने की उम्मीद है, जिससे आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी और विभागीय कार्यों का संचालन पहले की अपेक्षा अधिक प्रभावी हो सकेगा।