BBMB / सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल को बड़ी राहत, 20 साल में मिलेगी 11,973 मिलियन यूनिट बिजली
बीबीएमबी परियोजनाओं से जुड़े करीब 15 वर्षों से लंबित बिजली बकाया विवाद में हिमाचल प्रदेश को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने पंजाब और हरियाणा की ओर से अगले 20 वर्षों में हिमाचल को कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने की व्यवस्था को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इसे प्रदेश के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताते हुए दावा किया कि इस फैसले से अगले दो दशकों में राज्य को लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के करीब चार वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश के हितों से जुड़ी यह चौथी बड़ी सफलता है।
शिमला
15 वर्षों से लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं से संबंधित बिजली बकाया विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के पक्ष में महत्वपूर्ण व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके तहत पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में प्रदेश को कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध कराएंगे। भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से जुड़े पुराने बकाये का निपटारा नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में किया जाएगा। इससे हिमाचल को लंबे समय से लंबित अपने बिजली हिस्से का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा है बिजली बकाये का विवाद
बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में प्रदेश की हिस्सेदारी के संबंध में फैसला सुनाया था, लेकिन पुराने बकाये के भुगतान का मामला लंबित बना हुआ था। अब अदालत की मंजूरी के बाद बकाया बिजली की कुल मात्रा और भुगतान की अवधि निर्धारित हो गई है। इस व्यवस्था से प्रदेश को अपने हिस्से की बिजली मिलने के साथ भविष्य में अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।
20 वर्षों में 15 हजार करोड़ रुपये की आय का दावा
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि बीबीएमबी के बकाये के रूप में मिलने वाली बिजली प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने दावा किया कि अगले 20 वर्षों में इस व्यवस्था से राज्य के खजाने में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये आ सकते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्तमान में छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने पर प्रदेश को सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। हालांकि, अदालत की मंजूर कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली को 20 वर्षों में समान रूप से वितरित करने पर छह रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से औसत वार्षिक मूल्य करीब 359 करोड़ रुपये बनता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के अधिक आय वाले अनुमानों का विस्तृत गणना आधार स्पष्ट होना बाकी है।
ऊंची दरों पर बिजली बिक्री से बढ़ सकती है कमाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले भी विभिन्न राज्यों को बेहतर दरों पर बिजली बेच चुका है। उनके अनुसार राजस्थान को 15.50 रुपये, केरल को 14.50 रुपये और तमिलनाडु को 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेची गई है। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में इसी तरह के समझौते होने पर प्रदेश को सालाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। हालांकि, यह संभावित आय भविष्य की बिजली बिक्री दरों, आपूर्ति की मात्रा और संबंधित समझौतों की शर्तों पर निर्भर करेगी।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता और कानूनी टीम को दिया श्रेय
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस फैसले पर हिमाचल प्रदेश की लगभग 75 लाख जनता को बधाई देते हुए इसे राज्य के अधिकारों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने करीब चार वर्षों के कार्यकाल में हिमाचल के हितों से जुड़े मामलों में चौथी महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश की जनता, मंत्रिमंडल के सहयोगियों, अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों की टीम को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के संसाधनों और वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए भविष्य में भी मजबूती से प्रयास करती रहेगी।