जातिगत जनगणना की प्रश्नावली रद्द कर ड्रॉपडाउन सूची अपनाए सरकार: गुरदीप सिंह सप्पल
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर सवाल उठाते हुए इसकी प्रश्नावली रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जातियों की सही संख्या दर्ज करने के लिए प्रमाणित ड्रॉपडाउन सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बनाई जानी चाहिए। सप्पल के अनुसार, खुले प्रारूप में जाति और उपजाति के अलग-अलग नाम तथा वर्तनी दर्ज होने से आंकड़ों में विसंगतियां पैदा हो सकती हैं और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए उपयोगी डेटा नहीं मिल पाएगा।
शिमला
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी सदस्य और कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार गुरदीप सिंह सप्पल ने केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सही गिनती, सही आंकड़े और हिस्सेदारी की स्पष्ट जानकारी के लिए पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है। कांग्रेस ने तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के अनुसार प्रमाणित जाति सूची तैयार करने तथा राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से विचार-विमर्श के बाद नई प्रश्नावली बनाने की मांग रखी है।
खुले प्रारूप वाले सवाल पर जताई आपत्ति
सप्पल ने कहा कि आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में सवाल नंबर 10 के तहत ओपन-एंडेड विकल्प रखा गया है, जबकि कांग्रेस ड्रॉपडाउन सूची को आवश्यक मानती है। उन्होंने बताया कि ड्रॉपडाउन व्यवस्था में सरकार से मान्यता प्राप्त जातियों की तय सूची पहले से दर्ज रहती है और गणनाकार नागरिक के उत्तर के अनुसार संबंधित नाम चुनता है। इसके विपरीत खुले प्रारूप में नागरिक द्वारा बताए गए जाति या उपजाति के नाम को उसी वर्तनी के साथ दर्ज किया जाएगा, जिससे एक ही जाति के कई नाम सामने आने की आशंका है।
उन्होंने तर्क दिया कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही जाति विभिन्न नामों, उपजातियों, स्थानीय बोलियों और पर्यायवाची शब्दों से पहचानी जाती है। प्रमाणित सूची नहीं होने पर गणनाकार अलग-अलग वर्तनी के आधार पर इन्हें अलग प्रविष्टियों के रूप में दर्ज कर सकते हैं। सप्पल के मुताबिक इससे देशभर में जातियों के बड़ी संख्या में अलग नाम दर्ज होंगे और आंकड़ों में गंभीर विसंगतियां आ सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में जनगणना से प्राप्त डेटा का व्यावहारिक उपयोग कठिन हो जाएगा।
ओबीसी और ईबीसी के आंकड़ों को लेकर चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से ओबीसी और ईबीसी की वास्तविक आबादी का सही आकलन प्रभावित हो सकता है। उनके अनुसार, अलग-अलग नाम और वर्तनी के कारण एक जाति कई हिस्सों में दर्ज हुई तो आरक्षण, शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित हिस्सेदारी तय करने का आधार कमजोर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधायिका, नौकरशाही, न्यायपालिका और आर्थिक अवसरों में इन वर्गों की वास्तविक भागीदारी का प्रमाणिक आकलन विश्वसनीय जनसंख्या आंकड़ों पर निर्भर करता है।
सप्पल ने सार्वजनिक पटल पर आई खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक जून की बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास उपलब्ध ओबीसी जातियों की सूची साझा करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि सूची उपलब्ध होने के बावजूद उसे ड्रॉपडाउन व्यवस्था में शामिल क्यों नहीं किया गया। सप्पल ने दावा किया कि देश में करीब 4,200 जातियां हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारों के पास उनकी सूचियां पहले से उपलब्ध हैं।
कांग्रेस ने पुराने पत्रों का दिया हवाला
सप्पल ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से उचित प्रक्रिया के साथ जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, खरगे ने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 और 5 मई 2025 को भी पत्र लिखे थे। उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को वर्ष 2027 से जातिगत जनगणना कराने की घोषणा का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जातिगत जनगणना जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में शुरू हुई है, जबकि फरवरी 2027 से इसे देशभर में आरंभ किया जाना है। सप्पल के मुताबिक सरकार के पास अभी प्रश्नावली और प्रक्रिया में आवश्यक सुधार करने का समय है। कांग्रेस ने मांग दोहराई कि प्रमाणित जाति सूची के आधार पर प्रश्नावली तैयार की जाए, ताकि प्रत्येक जाति और समुदाय की संख्या का सटीक आकलन हो तथा प्राप्त आंकड़े सामाजिक न्याय संबंधी नीतियों के लिए उपयोगी बन सकें।