Category: una

  • ऊना बाजार में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की सक्रियता

    ऊना बाजार में अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की सक्रियता

    नववर्ष पर बाजार व्यवस्था सुधारने के लिए डीसी-एसपी ने उठाए सख्त कदम

    नववर्ष के पहले दिन जिला प्रशासन ऊना जनहित में पूरी सक्रियता और तत्परता से काम करता दिखा। उपायुक्त जतिन लाल ने पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह, एसडीएम विश्व मोहन देव चौहान और नगर परिषद ऊना के अधिकारियों के साथ पुराने बाजार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने, यातायात को सुचारू करने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए त्वरित कदम उठाए।

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई :
    नववर्ष के अवसर पर ऊना बाजार में भारी भीड़ के कारण विक्रेताओं द्वारा दुकानों के आगे अतिक्रमण और अस्थायी ढांचे खड़े करने से यातायात बाधित हो रहा था। उपायुक्त ने मौके पर पहुंचकर रेहड़ियों को मुख्य मार्ग से हटवाया और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया।

    व्यवस्थित व्यवस्था के निर्देश :
    उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि भविष्य में ऐसी बिक्री गतिविधियों को खुले और व्यवस्थित स्थानों पर आयोजित किया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही, लाइसेंस और अनुमति पर्चियों की जांच कर अनधिकृत व्यापारिक गतिविधियों पर सख्ती बरती गई।

    नो-वेंडिंग जोन का आदेश :
    प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर अनाधिकृत व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, मिनी सचिवालय से गलुआ चौक और क्षेत्रीय अस्पताल ऊना तक के क्षेत्र को नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है।

    इस त्वरित कार्रवाई के बाद बाजार व्यवस्था में सुधार देखने को मिला। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और बाजार की व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें।

  • अवैध खनन पर ऊना प्रशासन का कड़ा रुख, पांच खनन इकाइयां निलंबित

    अवैध खनन पर ऊना प्रशासन का कड़ा रुख, पांच खनन इकाइयां निलंबित

    पर्यावरण संरक्षण के लिए उपायुक्त की सख्त कार्रवाई, जनता से सहयोग की अपील

    ऊना जिले में अवैध और अवैज्ञानिक खनन को रोकने के लिए उपायुक्त जतिन लाल ने सोमवार को विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खनन नियमों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन पाए जाने पर पांच खनन इकाइयों को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया गया।

    निलंबित खनन इकाइयों में लखविंदर सिंह यूनिट 3 (गोंदपुर बुल्ला), लखविंदर सिंह यूनिट 1 (पोलियां), महादेव स्टोन क्रशर (नंगल खुर्द), एसएस स्टोन क्रशर (हलेरां बिलना), और बिल्डिंग स्ट्रेच क्रशिंग ज़ोन (पुबोवाल) शामिल हैं।

    प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण प्राथमिकता

    उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि ऊना जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और इनका संरक्षण सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। अवैज्ञानिक खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है और यह स्थानीय समुदाय के लिए भी खतरा बनता है।

    निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश

    उपायुक्त ने अधिकारियों को अवैध खनन पर निगरानी बढ़ाने और नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध खनन में लिप्त व्यक्तियों और इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

    जनता से सहयोग की अपील

    उपायुक्त ने जनता से अपील की कि यदि उन्हें अवैध या अवैज्ञानिक खनन से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले, तो वे तुरंत अधिकारियों को सूचित करें। इस सहयोग से जिले में अवैध खनन को पूरी तरह रोका जा सकेगा।

    यह कार्रवाई जिला प्रशासन के पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन को लेकर सख्त रुख को दर्शाती है।

  • हरोली : जल संकट से कुशल जल प्रबंधन तक का सफर, बना मिसाल

    हरोली : जल संकट से कुशल जल प्रबंधन तक का सफर, बना मिसाल

    दूरदर्शी नेतृत्व और ठोस योजनाओं ने बदली तस्वीर, जनता को मिली राहत

    हरोली विधानसभा क्षेत्र, जो कभी गंभीर जल संकट से जूझता था, आज कुशल जल प्रबंधन के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। हिमाचल प्रदेश के इस क्षेत्र ने पिछले एक साल में अभूतपूर्व बदलाव देखा है। जल संकट का स्थायी समाधान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई योजनाएं अब धरातल पर बदलाव ला रही हैं। इन परियोजनाओं ने न केवल तत्कालीन समस्याओं का समाधान किया है, बल्कि एक मजबूत और टिकाऊ जल प्रबंधन प्रणाली की नींव भी रखी है।

    दूरदर्शी नेतृत्व के सफल परिणाम

    हरोली के विधायक और हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री मुकेश अग्निहोत्री के नेतृत्व में जल प्रबंधन के लिए कई प्रभावी कदम उठाए गए। बीते एक साल में 41 करोड़ रुपये की लागत से 9 पेयजल परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ, जिससे 45,000 से अधिक लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सका। इसके अतिरिक्त, 122 करोड़ रुपये की लागत से 10 परियोजनाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

    महत्वपूर्ण रूप से, 64 बड़े जल भंडारण टैंकों का निर्माण किया गया है, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 12.8 मिलियन लीटर है। 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार ये टैंक वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हैं। उपमुख्यमंत्री का यह प्रयास उनकी जनकल्याण और दीर्घकालिक विकास के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    जनजीवन में सकारात्मक बदलाव

    जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता पुनीत शर्मा ने कहा कि इन जल भंडारण टैंकों का निर्माण केवल संरचनात्मक प्रगति नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों के लिए उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप परियोजनाओं ने लोगों के जीवन को सरल और स्वस्थ बना दिया है। अब हर मौसम में क्षेत्र के सभी घरों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

    औद्योगिक विकास को भी मिली मजबूती

    क्षेत्र में जल स्रोतों की रिचार्जिंग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बल्क ड्रग पार्क परियोजना के लिए 50 लाख लीटर और 25 लाख लीटर क्षमता वाले दो जल भंडारण टैंकों का निर्माण किया गया है। ये टैंक औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में सहायक होंगे और क्षेत्र को एक औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरने का अवसर देंगे।

    जनता ने व्यक्त किया आभार

    हरोली क्षेत्र के लोग जल संकट के इस क्रांतिकारी समाधान से बेहद संतुष्ट हैं। बीटन पंचायत के ओम प्रकाश ओमी जिंदड़ ने कहा कि पहले पीने के पानी की भारी समस्या थी, लेकिन नई परियोजनाओं और बड़े टैंकों के निर्माण से यह समस्या समाप्त हो गई है। बिमला देवी और माजरा जखेवाल के मदन लाल ने भी कहा कि जल आपूर्ति ने उनके जीवन को सरल बना दिया है।

    हरोली के निवासियों ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जल प्रबंधन का जो काम हुआ है, वह साबित करता है कि सही दिशा और दूरदर्शिता से संसाधनों का उपयोग कर जनजीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह प्रयास न केवल हरोली बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है।

  • बिलासपुर के सरकारी स्कूलों में स्पेस लैब्स , छात्रों को मिलेगा आधुनिक शिक्षा का लाभ

    बिलासपुर के सरकारी स्कूलों में स्पेस लैब्स , छात्रों को मिलेगा आधुनिक शिक्षा का लाभ

    शिक्षा में नवाचार : पांच स्कूलों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक स्पेस लैब्स

    जिला बिलासपुर में शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पांच सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक स्पेस लैब्स की स्थापना की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, और तकनीकी शिक्षा में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें।

    इन स्कूलों में स्थापित होंगी स्पेस लैब्स:

    1. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बिलासपुर
    2. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नन्होल
    3. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बरठीं
    4. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कपाहड़ा
    5. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डंगार

    प्रत्येक स्पेस लैब के लिए 10 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इन लैब्स में अत्याधुनिक उपकरण और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जो छात्रों को उन्नत तकनीकी शिक्षा प्रदान करने में मदद करेंगी। ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को तकनीकी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। इसके साथ ही, यह छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को प्रोत्साहन देने और शिक्षा को व्यावहारिक एवं प्रायोगिक स्तर पर उन्नत बनाने का प्रयास है।

    यह मॉडल 2018 में आईएएस अधिकारियों द्वारा शुरू किया गया था, जिसे अब बिलासपुर प्रशासन तेजी से लागू कर रहा है। भविष्य में इस योजना को पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना बनाई गई है।

    इस पहल से छात्रों में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ेगी। उन्हें प्रायोगिक और व्यावहारिक ज्ञान का अनुभव मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा का विस्तार सुनिश्चित होगा।

      उपायुक्त का दृष्टिकोण:
      उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा, “स्पेस लैब्स की यह पहल छात्रों के लिए विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के नए द्वार खोलेगी। यह न केवल शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाएगी बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी।”

      इस महत्वाकांक्षी योजना से बिलासपुर जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगा और यह प्रयास पूरे प्रदेश में एक अनुकरणीय मॉडल बनेगा।

    • एडवाइजरी / सर्दियों में छोटी सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा , सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव

      एडवाइजरी / सर्दियों में छोटी सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा , सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव

      सर्दियों में हीटर और अंगीठी के सुरक्षित उपयोग को लेकर जिला प्रशासन की एडवाइजरी

      ऊना जिले में सर्दियों के दौरान बढ़ती ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन ने हीटर और अंगीठी के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष जतिन लाल ने बताया कि इन उपकरणों का असुरक्षित उपयोग गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करें।

      बंद कमरे में हीटर या अंगीठी का उपयोग न करें
      अंगीठी और हीटर का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन हो। बंद कमरे में इनका उपयोग करने से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं, जिससे दम घुटने या मृत्यु की संभावना रहती है। विशेष रूप से सोने से पहले इन्हें बंद करना अनिवार्य है।

      अंगीठी और हीटर के उपयोग में बरतें सावधानी
      अंगीठी का सीमित मात्रा में और सही तरीके से उपयोग करें। इसके धुएं और गैसों से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, इलेक्ट्रिक और गैस हीटर की नियमित जांच और मरम्मत करवाएं। पुराने या क्षतिग्रस्त उपकरणों का उपयोग न करें, क्योंकि ये आग लगने या अन्य खतरों का कारण बन सकते हैं।

      परिवार को करें जागरूक
      बच्चों और बुजुर्गों को हीटर और अंगीठी के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दें। इस जागरूकता से अनहोनी घटनाओं को रोका जा सकता है। साथ ही, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता के लक्षण जैसे चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, उलझन या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो तो तुरंत ताजा हवा में जाएं और चिकित्सा सहायता लें।

      सुरक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी
      उपायुक्त जतिन लाल ने जिलावासियों से अपील की है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन करें और अपने आस-पास के लोगों को भी इन खतरों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करें। सर्दियों के दौरान थोड़ी सी सतर्कता बड़ी दुर्घटनाओं से बचा सकती है।

    • अंगीठी और हीटर से दम घुटने से पिता-पुत्र की मौत

      अंगीठी और हीटर से दम घुटने से पिता-पुत्र की मौत

      जलग्रां गांव में दुखद घटना , पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होंगे मौत के कारण


      थाना ऊना के तहत जलग्रां गांव में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे में पिता-पुत्र की दम घुटने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों रात को कमरे में अंगीठी और हीटर जलाकर सोए थे। घटना का पता रविवार सुबह उस समय चला, जब बड़े बेटे शरीफ ने चाय लेकर पिता शाहिद (48) और छोटे भाई सादिक (18) को उठाने के लिए उनके कमरे में प्रवेश किया।

      शरीफ ने उन्हें बेसुध हालत में पाया और तुरंत पुलिस और आसपास के लोगों को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस और चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मौत का कारण दम घुटना हो सकता है।

      20 साल से ऊना में रह रहे थे शाहिद
      मृतक पिता-पुत्र की पहचान मोहम्मद आजम नगर शाही, जिला बरेली, उत्तर प्रदेश के निवासी के रूप में हुई है। शाहिद पिछले 20 वर्षों से ऊना के अमर सिंह वार्ड-3, कुम्हारा दा मोहल्ला में अपने दो बेटों के साथ सब्जी बेचने का कारोबार कर रहे थे।

      घटना की जानकारी कैसे मिली
      शरीफ ने बताया कि शनिवार रात को वह दूसरी तबीयत खराब होने के कारण दूसरे कमरे में सो गया था। रविवार सुबह जब वह चाय लेकर उनके कमरे में पहुंचा, तो पाया कि पिता और भाई बिस्तर पर बेसुध पड़े हैं। उसे नहीं पता था कि वे अंगीठी और हीटर जलाकर सो रहे हैं।

      पुलिस की जांच जारी
      पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में दम घुटने को मौत का संभावित कारण माना जा रहा है। शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    • ऊना में स्थापित होगा आलू प्रसंस्करण संयंत्र, किसानों को मिलेगा फायदा : सीएम सुक्खू

      ऊना में स्थापित होगा आलू प्रसंस्करण संयंत्र, किसानों को मिलेगा फायदा : सीएम सुक्खू

      विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश

      हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि ऊना जिले में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से आलू प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा । यह संयंत्र 500 किलोग्राम प्रति घंटे की न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता वाला होगा और मुख्य रूप से आलू फ्लेक्स के उत्पादन पर केंद्रित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

      सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 14% है, जिसमें आलू एक प्रमुख फसल है। राज्य के कुल सब्जी उत्पादन में आलू का हिस्सा लगभग 20% है। वर्तमान में, प्रदेश में 16,960 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 2,38,317 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है।

      स्थानीय अर्थव्यवस्था और किसानों को लाभ
      आलू प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। यह उद्योग और कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।

      आलू बाजार होगा स्थिर
      मुख्यमंत्री ने कहा कि आलू को फ्लेक्स जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने से बाजार में मूल्य स्थिर रहेगा। ताजा आलू के बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को राहत मिलेगी। आलू फ्लेक्स एक मूल्यवर्धित उत्पाद है, जो पकाने, मसलने और सुखाने की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे उन्नत तकनीक और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा।

      ऊना के लिए उपयुक्त स्थान
      ऊना जिले में शरद और वसंत ऋतुओं में 3,400 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 54,200 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है, जिससे यह संयंत्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान है। इसके अतिरिक्त, पड़ोसी राज्य पंजाब में भी आलू का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, जो इस उद्योग के लिए कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

      आलू प्रसंस्करण संयंत्र न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी विकास के माध्यम से राज्य की कृषि और उद्योग के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगा।

    • नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की कठोर सजा

      नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की कठोर सजा

      स्पेशल जज जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार की अदालत ने नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म के आरोपी जो की नंदपुर (अंब) का रहने वाला है को, 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत दोषी को यह सजा दी है। इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न अदा करने पर दोषी को एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।न्यायालय ने अपने फैसले में दोषी को धारा 363 के तहत भी तीन साल की सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना सुनाया।

      मामला 6 जून 2022 का है, जब पीड़िता के पिता ने थाना ऊना सदर में बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने आरोपी पर उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप लगाया। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को उसके गांव नंदपुर से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान पीड़िता को भी आरोपी के घर से बरामद किया गया।

      पुलिस जांच में पीड़िता ने बयान दिया कि आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मेडिकल जांच और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर सभी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने 16 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनके आधार पर अदालत ने दोषी को सजा सुनाई।

    • ऊना में अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, ड्रोन तकनीक बनी प्रशासन का हथियार

      ऊना में अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, ड्रोन तकनीक बनी प्रशासन का हथियार

      जिले को अवैध खनन मुक्त बनाने की मुहिम तेज, हाई-टेक तकनीक से सटीक कार्रवाई

      ऊना जिला प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। प्रशासन ने ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए बाथू, बथड़ी और टाहलीवाल क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। उपायुक्त जतिन लाल और पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह के नेतृत्व में इस निरीक्षण के दौरान अवैध खनन में संलिप्त वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया गया।

      उपायुक्त ने कहा कि परंपरागत निगरानी के साथ-साथ हाई-टेक उपकरणों का उपयोग हमारी नई रणनीति का हिस्सा है। ड्रोन तकनीक के सहारे अवैध खनन गतिविधियों पर सटीक नजर रखी जा रही है, जिससे कार्रवाई अधिक प्रभावी और तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन प्रदेश सरकार की शून्य सहनशीलता की नीति को पूरी सख्ती से लागू कर रहा है।

      जिले को अवैध खनन मुक्त बनाने की अपील:
      उपायुक्त ने जिलावासियों से अपील की कि वे अवैध खनन की किसी भी गतिविधि की जानकारी प्रशासन या पुलिस को तुरंत दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले को अवैध खनन मुक्त बनाने के लिए जनता का सहयोग आवश्यक है और इस दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

      ड्रोन टेक्नोलॉजी से निगरानी में सफलता:
      पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने जिले के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीकी साधन अवैध खनन की निगरानी में सटीकता और पारदर्शिता लाने में मदद कर रहा है।

      प्रशासन और पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई से ऊना जिले में अवैध खनन पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। आने वाले समय में इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

    • वीर जवान परमवीर सिंह को अंतिम विदाई , पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदा

      वीर जवान परमवीर सिंह को अंतिम विदाई , पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदा

      गांव बीटन में गम और गर्व का माहौल, “वीर परमवीर अमर रहें” के नारों से गूंजा इलाका

      तीन-सिख रेजिमेंट के वीर जवान परमवीर सिंह को बुधवार को उनके पैतृक गांव बीटन में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सुबह से ही गांव के लोग बड़ी संख्या में उनके घर और सड़क के किनारे एकत्रित होकर उनके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे।

      सुबह 11 बजे जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा इलाका गम और गर्व से भर उठा। “वीर परमवीर अमर रहें” के नारों से गांव गूंजने लगा।

      परमवीर सिंह की अंतिम यात्रा उनके घर से शुरू हुई। सिख धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार, तीन-सिख रेजिमेंट के 30 जवानों ने उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजे खुले वाहन में श्मशानघाट तक पहुंचाया। वहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई।

      परमवीर अपने पीछे पत्नी, पांच वर्षीय बेटा, बड़ा भाई, भाभी, भतीजा और तीन बहनों को छोड़ गए हैं। उनके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है।

      गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी:

      अंतिम संस्कार में एएसपी ऊना संजीव भाटिया, एसडीएम हरोली विशाल शर्मा, टाहलीवाल थाना प्रभारी रिंकू सूर्यवंशी, इंस्पेक्टर संजय शर्मा, रिटायर्ड कैप्टन शक्ति चंद, और सिख रेजिमेंट के मेजर शुभम ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

      इसके अलावा, भाजपा नेता राम कुमार, जिला परिषद सदस्य कमल सैनी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत राय, और बीटन गांव की प्रधान परमजीत समेत आसपास के गांवों के लोग भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

      गांववालों ने जताया गर्व और संबल देने का संकल्प:

      परमवीर सिंह के बलिदान पर गांववालों ने गर्व जताया और इस कठिन समय में उनके परिवार को संबल देने का संकल्प लिया। गांव के लोगों ने कहा कि परमवीर का जीवन और बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा है।


      If you’d like any further changes, feel free to ask!