केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मिले सीएम सुक्खू, हिमाचल के लंबित विद्युत मुद्दे उठाए
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश के विद्युत क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण और लंबित विषय उठाए। उन्होंने निःशुल्क विद्युत हिस्से, जलविद्युत परियोजनाओं के हस्तांतरण, अतिरिक्त मुफ्त बिजली और बीबीएमबी की अनुपयोगी भूमि से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान करने का आग्रह किया।
नई दिल्ली
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के निःशुल्क विद्युत हिस्से के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र दिए जाने का विषय प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने निःशुल्क विद्युत हिस्से का उचित लाभ मिलना चाहिए और इस संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण एवं समाधान प्रदान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सतलुज जल विद्युत निगम के निदेशक मंडल में हिमाचल प्रदेश की ओर से दो स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की।
शानन और बैरा स्यूल परियोजनाओं के हस्तांतरण की मांग
मुख्यमंत्री ने शानन जल विद्युत परियोजना को हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित करने का मामला भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने परियोजना पर राज्य के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। शानन परियोजना से संबंधित मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने 180 मेगावाट क्षमता वाली बैरा स्यूल जल विद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को सौंपने की प्रक्रिया भी शीघ्र आगे बढ़ाने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति लागू होने से पहले शुरू हुई केंद्रीय क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में एक प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्त बिजली देने की राज्य की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के विकास में तेजी आएगी और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, इससे हिमाचल प्रदेश को लगभग 29.34 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ मिलने की संभावना है।
सरकारी आकलन के मुताबिक, इस व्यवस्था से अन्य लाभार्थी राज्यों पर करीब 96.57 करोड़ रुपये का वार्षिक भार पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश का अनुमानित शुद्ध वार्षिक लाभ लगभग 23.21 करोड़ रुपये होगा, जबकि अन्य लाभार्थी राज्यों पर टैरिफ का प्रभाव करीब 1.15 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विद्युत हितों से जुड़े इन विषयों का समाधान हिमाचल की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास के लिए आवश्यक है।
बीबीएमबी की अनुपयोगी भूमि का मामला भी उठाया
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की ओर से प्रदेश में अधिकृत ऐसी भूमि को राज्य सरकार के उपयोग के लिए उपलब्ध करवाने का आग्रह किया, जिसका वर्तमान में इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस भूमि का उपयोग सरकारी कार्यालयों के निर्माण के साथ परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उन्हें भूमि उपलब्ध करवाने में किया जा सकता है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सभी विषयों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष दोहराया कि जलविद्युत क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए राज्य से संबंधित लंबित मामलों पर शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए।