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CM सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री खट्टर से की मुलाकात, बिजली रॉयल्टी और शहरी परियोजनाओं पर उठाए मुद्दे

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 3 Hours Ago • 1 Min Read

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर बिजली रॉयल्टी, ऊर्जा बकाया और विभिन्न शहरी विकास परियोजनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने राज्य से संबंधित लंबित मामलों के समाधान और विभिन्न योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया।

शिमला

बिजली रॉयल्टी बढ़ाने का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात के दौरान राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न विषयों को विस्तार से उठाया। उन्होंने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा संचालित उन जलविद्युत परियोजनाओं में, जिनकी प्रारंभिक 12 वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, वर्तमान में मिलने वाली 12 प्रतिशत निःशुल्क बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त हिस्सेदारी बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख जलविद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल है और राज्य की नदियों एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से 180 मेगावाट क्षमता वाली बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना का मामला उठाते हुए कहा कि परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस आधार पर उन्होंने परियोजना से मिलने वाली निःशुल्क बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग विकासात्मक और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकेगा।

बीबीएमबी ऊर्जा बकाया का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं से संबंधित ऊर्जा बकाया भुगतान का विषय भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान प्रदेश के कई क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण हुआ, बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए तथा राज्य को पर्यावरणीय प्रभावों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पौंग बांध से प्रभावित कई परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मुद्दे अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं।मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि 31 अक्तूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद देय 6 प्रतिशत ब्याज सहित राज्य के दावों पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस ऊर्जा बकाया का भुगतान वित्तीय रूप में किया जाता है तो वर्तमान गणना के अनुसार इसकी अनुमानित राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये बनती है। मुख्यमंत्री ने इस विषय के शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया।

शानन परियोजना पर रखा राज्य का पक्ष

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं तथा राज्य सरकार के दृष्टिकोण को केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से संबंधित मामलों पर राज्य का पक्ष विधिक और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट है तथा इस विषय पर केंद्र सरकार का सहयोग अपेक्षित है।

कांगड़ा की विकास परियोजनाओं के लिए मांगी सहायता

मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ परियोजनाओं के विकास के लिए वित्तीय सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देना है। उन्होंने बताया कि कांगड़ा क्षेत्र को राज्य सरकार भविष्य के विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

अर्बन चैलेंज फंड और अमृत योजना पर चर्चा

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत कुल 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित कर रही है। इनमें आधारभूत ढांचे के विकास, शहरी सुविधाओं के विस्तार, यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक सेवाओं के सुदृढ़ीकरण तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े विभिन्न कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रथम चरण में केंद्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजी जा चुकी हैं।इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज इनिशिएटिव’ के अंतर्गत स्वच्छता एवं ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने अमृत योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने तथा अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में प्रस्तावित 43 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का भी आग्रह किया।

डिजिटल डोर प्लेट परियोजना के लिए भी मांगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में प्रत्येक संपत्ति को विशिष्ट पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से क्यूआर आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली लागू की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने, कर संग्रहण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने तथा नागरिक सेवाओं की निगरानी और प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।उन्होंने कहा कि परियोजना का दूसरा चरण आगामी वर्षों में लागू किया जाना प्रस्तावित है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए अगले पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक आधारित यह पहल शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी और डेटा आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।