दिनेश आर्य का केंद्र पर आरोप, वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन दबाने के लिए लगाए प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश आर्य ने केंद्र सरकार पर कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे जन आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में रास्तों, रेल और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध तथा इंटरनेट सेवाएं बाधित किए जाने की खबरें लोकतांत्रिक विरोध को सीमित करने की कोशिश को दर्शाती हैं। उन्होंने जंतर-मंतर को दोबारा आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता देने की मांग भी की।
राजगढ़
मंगलवार को मीडिया के लिए जारी बयान में दिनेश आर्य ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। उन्होंने दावा किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने करीब दो वर्ष पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाया था और हाल के घटनाक्रम से उस मुद्दे को बल मिला है। आर्य के अनुसार, इन सवालों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आर्य ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों और युवाओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर दिल्ली में आंदोलन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ विभिन्न प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। उनका कहना था कि राष्ट्रीय राजधानी को सुरक्षा घेरे में लेना और प्रदर्शनकारियों की आवाज सीमित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
जंतर-मंतर पर प्रतिबंध का किया विरोध
दिनेश आर्य ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी मांग और असहमति शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह स्थान पिछले 33 वर्षों से जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच रहा है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सीमित करते हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से जंतर-मंतर को फिर से आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की मान्यता देने की मांग की, ताकि नागरिक और राजनीतिक संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के समक्ष रख सकें। आर्य ने कहा कि सरकार को जन आंदोलनों से घबराने के बजाय उनमें उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने असहमति का सम्मान करने और जनता की आवाज सुनने को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।