Election Result / 25 वर्षीय निर्दलीय उम्मीदवार ने 3557 मतों से दर्ज की शानदार जीत, भविष्य की राजनीति में बढ़ी संभावनाओं पर शुरू हुई चर्चा
Election Result : पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के जिला परिषद वार्ड नंबर-7 भगानी से निर्दलीय उम्मीदवार शिवानी ने चुनाव में जीत दर्ज की है। चुनाव परिणामों के अनुसार उन्हें 9205 मत प्राप्त हुए और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3557 मतों के अंतर से पराजित किया। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी शिवानी की जीत को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण चुनावी परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
पांवटा साहिब
पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के जिला परिषद चुनाव में वार्ड नंबर-7 भगानी से आई एक जीत इन दिनों पूरे क्षेत्र की राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। यह जीत किसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी की नहीं, बल्कि एक ऐसे युवा चेहरे की है जिसने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर न केवल जीत दर्ज की बल्कि बड़े अंतर से जीत हासिल कर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए।महज 25 वर्ष की आयु में चुनावी राजनीति में कदम रखने वाली शिवानी ने जिला परिषद वार्ड भगानी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 9205 मत हासिल किए। उन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार दविंदर कौर को 3557 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। कांग्रेस समर्थित खुशप्रीत कौर सहित अन्य उम्मीदवार भी मुकाबले में थीं, लेकिन परिणाम आने के बाद सबसे अधिक चर्चा शिवानी की जीत को लेकर ही शुरू हो गई।
गांव खोदरी माजरी पंचायत से संबंध रखने वाली शिवानी विज्ञान स्नातक हैं और लेखन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली शिवानी के लिए यह पहला चुनाव था, लेकिन चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्र में उन्होंने अपेक्षा से कहीं अधिक मजबूत जनसमर्थन तैयार किया हुआ था।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस जीत का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि एक निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीत गई, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि यह जीत ऐसे समय में आई है जब अधिकांश चुनाव राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और चुनावी नेटवर्क के आधार पर लड़े जाते हैं। ऐसे माहौल में किसी युवा निर्दलीय उम्मीदवार का इतने बड़े अंतर से जीतना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दलों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
शिवानी किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता रघुवीर सिंह और माता श्यामा देवी कृषि कार्यों से जुड़े हैं। परिवार का राजनीति में कोई बड़ा प्रभावशाली इतिहास नहीं रहा। हालांकि उनके दादा केशो राम 1980 के दशक में ग्राम प्रधान रहे थे, लेकिन शिवानी की पहचान उनकी अपनी सामाजिक सक्रियता और जनसंपर्क के आधार पर बनी है।क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि शिवानी की जीत केवल एक पंचायत या एक वर्ग तक सीमित समर्थन का परिणाम नहीं है। उन्हें विभिन्न पंचायतों और युवाओं का व्यापक समर्थन मिला, जिसने उन्हें अन्य उम्मीदवारों से काफी आगे पहुंचा दिया। यही वजह है कि इस परिणाम को स्थानीय राजनीति में उभरते नए नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।
मेहरा राजपूत समुदाय से संबंध रखने वाली शिवानी स्वयं भी यह मानती हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों को राजनीति में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने अपनी राजनीति को किसी एक वर्ग तक सीमित रखने की बजाय पूरे क्षेत्र के विकास और युवाओं की भागीदारी से जोड़कर प्रस्तुत किया है। चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने विकास, रोजगार, स्थानीय समस्याओं और जनभागीदारी को प्रमुख मुद्दा बनाया।राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह जीत भविष्य में शिवानी को किसी बड़े राजनीतिक मंच तक पहुंचाने का आधार बनेगी। फिलहाल उन्होंने किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने को लेकर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। उनका कहना है कि राजनीति में उनका उद्देश्य पद प्राप्त करना नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास में प्रभावी भूमिका निभाना है। भविष्य में कौन-सा राजनीतिक रास्ता चुना जाएगा, यह समय के साथ तय होगा।
चुनावी अभियान के दौरान अधिवक्ता सुखबीर सिंह की सक्रिय भूमिका भी चर्चा का विषय रही। स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक समन्वय और जनसंपर्क में उनके योगदान को भी इस जीत के महत्वपूर्ण कारणों में गिना जा रहा है।फिलहाल भगानी से आई यह जीत जिला परिषद के एक चुनावी परिणाम से आगे निकलकर पांवटा साहिब की राजनीति में एक नए चेहरे की मजबूत दस्तक के रूप में देखी जा रही है। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस चुनाव ने शिवानी को स्थानीय राजनीति के उन नामों की सूची में ला खड़ा किया है, जिन पर आने वाले वर्षों में राजनीतिक दलों और मतदाताओं—दोनों की नजर बनी रहेगी।