Employee / हिमाचल हाईकोर्ट का आदेश, सरकारीकरण से पहले की सेवा अवधि भी कॉलेज शिक्षकों की पेंशन में होगी शामिल
Employee : सरकारीकरण किए गए निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि सरकारीकरण से पहले की पूरी सेवा अवधि को पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट की गणना में शामिल किया जाएगा तथा निर्धारित अवधि में लाभ जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
शिमला
हाईकोर्ट ने सेवा अवधि को लेकर दिए स्पष्ट निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारीकरण किए गए निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की सेवा अवधि को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा कि जिन कॉलेजों का बाद में सरकारीकरण किया गया, वहां शिक्षकों द्वारा सरकारीकरण से पहले दी गई पूरी सेवा अवधि को पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट सहित सभी सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल किया जाना आवश्यक होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक संस्थान में दी गई सेवाओं को केवल सरकारीकरण की तिथि के आधार पर अलग नहीं किया जा सकता।
अदालत ने निरंतर सेवा के सिद्धांत को माना लागू
न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज ने अपने फैसले में कहा कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक कॉलेजों में शैक्षणिक सेवाएं दी हैं, उनकी सेवा को निरंतर सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत के अनुसार सरकारीकरण के बाद भी पूर्व सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति लाभों की गणना से बाहर रखना उचित नहीं है और ऐसे मामलों में सभी पात्र लाभ नियमानुसार प्रदान किए जाने चाहिए।
बैजनाथ कॉलेज से जुड़ा है मामला
यह मामला कांगड़ा जिले के बैजनाथ स्थित गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज से संबंधित है। याचिकाकर्ता वर्ष 1983 में कॉलेज में लेक्चरर के रूप में नियुक्त हुए थे, जिसे वर्तमान में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद कहा जाता है। यह कॉलेज हिमाचल प्रदेश सरकार से 95 प्रतिशत ग्रांट-इन-एड प्राप्त करता था तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्ध था। शिक्षकों की नियुक्तियां विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों और आवश्यक योग्यताओं के अनुसार की गई थीं तथा उन्हें विश्वविद्यालय की स्वीकृति भी प्राप्त थी।
सरकारीकरण के बाद पूर्व सेवा को नहीं जोड़ा गया था
राज्य सरकार ने 8 फरवरी 2007 को अधिसूचना जारी करते हुए 4 जनवरी 2007 से कॉलेज और उसके कर्मचारियों का सरकारीकरण कर दिया था। हालांकि सरकारीकरण से पहले शिक्षकों द्वारा दी गई लगभग 20 से 24 वर्ष की सेवा अवधि को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल नहीं किया गया। इसी निर्णय के विरुद्ध शिक्षकों ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था।
तीन माह में लाभ जारी करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के दायित्व और कार्य सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों के समान हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा ऐसे संस्थानों को दी जाने वाली 95 प्रतिशत वित्तीय सहायता का उद्देश्य शिक्षकों को सेवा सुरक्षा और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की वर्ष 1983 से प्रारंभ हुई पूरी सेवा अवधि को पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट की गणना में शामिल करते हुए तीन महीने के भीतर सभी वित्तीय लाभ जारी किए जाएं। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो बकाया राशि पर देरी की अवधि के लिए छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।