छात्र अध्ययन यात्रा से लौटे इटरनल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का भव्य स्वागत
भोपाल में आयोजित छात्र अध्ययन यात्रा से लौटे इटरनल विश्वविद्यालय के छह विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय परिसर में स्वागत किया गया, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। अध्ययन यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय भाषा, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ के लिए महत्वपूर्ण बताया।
राजगढ़
भारत सरकार के केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली द्वारा 13 से 21 जुलाई तक भोपाल में आयोजित छात्र अध्ययन यात्रा में भाग लेकर लौटे इटरनल विश्वविद्यालय, बड़ू साहिब के छह विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय परिसर में भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और अध्ययन यात्रा को जीवन का यादगार एवं प्रेरणादायक अनुभव बताया।यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने भोपाल के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों, ऐतिहासिक धरोहरों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें भारतीय भाषाओं, साहित्य, संस्कृति, इतिहास और देश की समृद्ध विरासत को निकट से जानने-समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि इस अध्ययन यात्रा ने उनके ज्ञान, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को नई दिशा दी।
अध्ययन यात्रा के दौरान विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ. बाबली ने मार्गदर्शक के रूप में विद्यार्थियों का नेतृत्व किया और पूरी यात्रा के दौरान अनुशासन, सुरक्षा एवं सभी गतिविधियों का सफल समन्वय सुनिश्चित किया।कार्यक्रम में कुलपति डॉ. नीलम कौर ने कहा कि केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा आयोजित इस प्रकार की अध्ययन यात्राएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, राष्ट्रीय सोच और सांस्कृतिक समझ को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने के साथ भारतीय भाषाओं, संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति परमपूज्य संत बाबा डॉ. देवेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि अध्ययन यात्राएं बौद्धिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक विकास का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अनुभव अन्य छात्रों के साथ साझा करने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक और शोध कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।हिंदी संकाय के सहायक आचार्य डॉ. अम्ब्रीश त्रिपाठी ने बताया कि यह अध्ययन यात्रा विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी रही। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता से जोड़ने के साथ हिंदी भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति नई सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय परिवार ने केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के अध्ययन कार्यक्रम हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।