Loading...

FIR / पूर्व एसएसपी संजीव कुमार गांधी पर कांस्टेबल का भुगतान रोकने और फंड में अनियमितता का आरोप

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 43 Mins Ago • 1 Min Read

FIR / शिमला के तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ एक कांस्टेबल की स्वीकृत राशि का भुगतान नहीं करने और पुलिस फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, कांस्टेबल ने सरकारी व्यवस्थाओं के लिए अपनी जेब से 1,87,890 रुपये खर्च किए थे, लेकिन बिल स्वीकृत होने के बाद भी उसे भुगतान नहीं मिला। सदर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।

शिमला

पुलिस थाना सदर में 22 अक्तूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस लाइन कैथू में तैनात कांस्टेबल ने शिकायत में आरोप लगाया कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उसे सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं के लिए जरूरी सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उसे खर्च की गई राशि बाद में दिए जाने का आश्वासन मिला था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने जरूरी व्यवस्थाओं के लिए कुल 1,87,890 रुपये अपनी जेब से खर्च किए और संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए। जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए स्वीकृति भी मिल गई थी। आरोप है कि छह फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी ने उसे बुलाकर भुगतान से जुड़े वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। कांस्टेबल को बताया गया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर आवश्यक हैं, लेकिन इसके बाद भी स्वीकृत राशि उसके खाते में जमा नहीं हुई।

वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितता

कांस्टेबल ने जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से जानकारी जुटाई। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान उसे पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसका भुगतान नहीं किया गया। इसके कारण उसे अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी। शिकायत मिलने के बाद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों में कुल 2.35 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया।

रिकॉर्ड के आधार पर आरोप लगाया गया है कि संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला पद से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण होने के दौरान फंड में आई कमी को पूरा करने के लिए कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। कांस्टेबल को भुगतान करने के बजाय राशि फंड में जमा होने से वह अपनी स्वीकृत रकम से वंचित रहा। प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं के तथ्य सामने आने पर केस दर्ज किया गया।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और संबंधित वित्तीय लेनदेन तथा दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। आईपीएस अधिकारी संजीव कुमार गांधी से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो पाए। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

Related Topics: •