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हिमाचल में खाद्य जांच का विस्तार, चार नई प्रयोगशालाएं बनेंगी; कंडाघाट लैब का होगा उन्नयन

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 55 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट की जांच का दायरा बढ़ाने के लिए चार नई खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना है। कंडाघाट की संयुक्त परीक्षण प्रयोगशाला को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि धर्मशाला में नई प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रस्तावित पोषण नीति में मोबाइल फूड टेस्टिंग, जल गुणवत्ता की निगरानी और पोषण संबंधी आंकड़ों के डिजिटल एकीकरण का भी प्रावधान है।

शिमला

हिमाचल प्रदेश पोषण नीति-2026 में खाद्य सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चार नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य है। प्रयोगशालाओं के नियमित संचालन के लिए आवश्यक पदों के सृजन और उन्हें भरने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है, ताकि ढांचा तैयार होने के साथ जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके।

कंडाघाट प्रयोगशाला की बढ़ेगी जांच क्षमता

नई प्रयोगशालाओं के साथ कंडाघाट स्थित संयुक्त परीक्षण प्रयोगशाला का उन्नयन भी किया जाएगा। मौजूदा परीक्षण व्यवस्था मजबूत होने से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी और जांच क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। सरकार के अनुसार, इससे मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों की पहचान करने के साथ निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

प्रदेश में प्रस्तावित चार प्रयोगशालाओं की योजना के बीच धर्मशाला में नई खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। नई प्रयोगशालाओं और मौजूदा लैब के उन्नयन को खाद्य सुरक्षा की निगरानी से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर नजर रखने और मिलावट या दूषित भोजन की पहचान होने के बाद आवश्यक कार्रवाई के लिए बेहतर आधार उपलब्ध होगा।

मोबाइल टेस्टिंग और पोषण पोर्टल का प्रस्ताव

नई नीति में स्थायी प्रयोगशालाओं के साथ मोबाइल खाद्य परीक्षण सुविधाएं शुरू करने का भी प्रस्ताव है, ताकि जांच सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके। जल गुणवत्ता की निगरानी को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। खाद्य पदार्थों और पानी की गुणवत्ता पर निगरानी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की समय रहते पहचान करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावित राज्य पोषण पोर्टल के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों और क्षेत्रों से प्राप्त पोषण संबंधी आंकड़ों को डिजिटल रूप से एकीकृत किया जाएगा। इससे आंकड़ों की निगरानी और विश्लेषण के साथ साक्ष्य आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना और गुणवत्ता की निगरानी सुधारना जनस्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार पोषण जागरूकता, खाद्य सुरक्षा शिक्षा और मौजूदा कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर देगी।

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