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हिमाचल पोषण नीति-2026 मंजूर, कुपोषण और एनीमिया से निपटने में स्थानीय आहार को प्राथमिकता

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 56 Mins Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुपोषण, एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश पोषण नीति-2026 को मंजूरी दी है। नीति में पारंपरिक हिमाचली खानपान, मोटे अनाज, दालों, मौसमी फलों, हरी पत्तेदार सब्जियों और दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। बच्चों, महिलाओं, किशोरों और कमजोर वर्गों के पोषण पर विशेष ध्यान देने के साथ दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों तक सुरक्षित, पौष्टिक और किफायती भोजन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

शिमला

नई नीति में कुपोषण के साथ एनीमिया, आहार में विविधता की कमी, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और खानपान से जुड़ी उभरती बीमारियों से निपटने के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य पोषण कार्यक्रमों के संचालन तक सीमित रहने के बजाय लोगों की दैनिक खानपान की आदतों में सुधार करना है। इसके तहत ऐसे संतुलित आहार को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करने के साथ स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक खानपान के अनुरूप हो तथा परिवारों के लिए आसानी से उपलब्ध और किफायती भी रहे।

पारंपरिक हिमाचली खाद्य पदार्थों को बढ़ावा

नीति में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। जागरूकता अभियानों और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पारंपरिक हिमाचली भोजन के साथ मोटे अनाज, दालें, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और दुग्ध उत्पाद अपने नियमित आहार में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे संतुलित भोजन की उपलब्धता बढ़ाने, स्वस्थ खानपान की आदतें विकसित करने और स्थानीय खाद्य संसाधनों की उपयोगिता को प्रमुखता देने में सहायता मिलेगी।

पहले 1,000 दिनों और कमजोर वर्गों पर ध्यान

पोषण नीति में जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए जीवन के पहले 1,000 दिनों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। मातृ एवं शिशु पोषण के साथ किशोरों और समाज के कमजोर वर्गों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाएंगे, ताकि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कोई वर्ग आवश्यक पोषण सुविधाओं से वंचित न रहे।

ICDS, पीएम पोषण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर जोर

नीति के क्रियान्वयन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कृषि, बागवानी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जल शक्ति, ग्रामीण विकास और पंचायती राज सहित विभिन्न विभागों की भूमिका तय की गई है। विभागीय समन्वय के माध्यम से एकीकृत बाल विकास सेवा, पीएम पोषण योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत चल रहे पोषण कार्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा। सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन संचार के जरिए लोगों में स्वस्थ एवं संतुलित खानपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान रहेगा।

राज्य और जिला स्तर पर बनेंगे समन्वय प्रकोष्ठ

योजना निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए राज्य पोषण समन्वय प्रकोष्ठ और जिला पोषण समन्वय प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये प्रकोष्ठ पोषण कार्यक्रमों की प्रगति की निगरानी करने के साथ संबंधित विभागों के बीच समन्वय मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रत्येक बच्चे, महिला और नागरिक को सुरक्षित, पौष्टिक एवं किफायती भोजन उपलब्ध होना आवश्यक है। उनके अनुसार नीति का प्रभावी क्रियान्वयन कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी घटाने तथा भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक होगा।

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