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मछुआरों को नावों पर 70 प्रतिशत और कास्ट-गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी देगी प्रदेश सरकार

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 23 Hours Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मछुआरों की आजीविका मजबूत करने और मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नावों तथा मछली पकड़ने के उपकरणों पर सब्सिडी देने की योजनाएं शुरू की हैं। पात्र जलाशय मछुआरों को नाव खरीदने पर 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता मिलेगी, जबकि कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाएगी। सरकार का उद्देश्य मछली पकड़ने की गतिविधियों को आधुनिक बनाकर मछुआरों की सुरक्षा, कार्यकुशलता और आय में सुधार करना है।

शिमला

फिशिंग बोट सब्सिडी योजना के तहत पात्र जलाशय मछुआरों को नाव खरीदने के लिए 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी। प्रत्येक नाव की लागत 50 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें 35 हजार रुपये राज्य सरकार वहन करेगी और शेष 15 हजार रुपये लाभार्थी को देने होंगे। योजना का लाभ गोबिंद सागर, पोंग डैम, चमेरा, रणजीत सागर और कोल डैम सहित प्रमुख जलाशयों में सक्रिय मछुआरों को मिलेगा। पात्रता के लिए आवेदक का किसी पंजीकृत प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति का सक्रिय सदस्य होना और वित्तीय वर्ष के दौरान कम से कम 50 दिन मछली पकड़ने का कार्य करना आवश्यक है।

कास्ट नेट 300 और गिल नेट 500 रुपये में मिलेगा

सरकार ने सब्सिडाइज्ड फिशिंग गियर योजना भी शुरू की है, जिसके तहत कास्ट नेट और गिल नेट पर 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। नदी क्षेत्रों के मछुआरों को 3 हजार रुपये लागत वाला कास्ट नेट केवल 300 रुपये में मिलेगा और शेष 2,700 रुपये सरकार वहन करेगी। इसी तरह जलाशय मछुआरों को 5 हजार रुपये लागत वाला गिल नेट 500 रुपये में उपलब्ध होगा, जबकि 4,500 रुपये राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में देगी।

7 हजार सक्रिय मछुआरों को मिलेगा लाभ

योजना के तहत नदी क्षेत्रों के 4 हजार सक्रिय मछुआरों को कास्ट नेट और जलाशयों में कार्यरत 3 हजार सक्रिय मछुआरों को गिल नेट उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है। सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से दी जाएगी। योजना का लाभ लेने वाले पात्र लाभार्थियों के पास मत्स्य विभाग द्वारा जारी तीन वर्षों से वैध मछली पकड़ने का लाइसेंस होना आवश्यक है।

ब्लू इकोनॉमी और ग्रामीण रोजगार पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन की व्यापक संभावनाएं हैं और सरकार इसे आजीविका तथा रोजगार के स्थायी साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से मछुआरों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने तथा मछली उत्पादन, मूल्य संवर्धन और आय सृजन बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

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